सरगुजा// छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में जल संसाधन विभाग के रिश्वतखोर क्लर्क को विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) की अदालत ने 3 साल के कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही कोर्ट ने 5 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है।

स्पेशल कोर्ट ने क्लर्क को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है।
दरअसल, क्लर्क ने विभाग के रिटायर्ड चौकीदार की ग्रेच्युटी की राशि दिलाने और पेंशन मंजूर कराने के बदले 7 हजार रुपए रिश्वत मांगी थी। इसकी शिकायत मिलने पर एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने जांच की और कार्रवाई करते हुए क्लर्क को रिश्वत लेते हुए पकड़ा था।
जानकारी के अनुसार 13 अगस्त 2020 को एसीबी सरगुजा की टीम ने जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता (ईई) कार्यालय में पदस्थ क्लर्क वीके सिन्हा को 7 हजार रुपए रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। आरोपी कार्यालय के पास मेन रोड पर शिकायतकर्ता से रिश्वत ले रहा था।
रिटायर्ड चौकीदार से मांगी थी रिश्वत
जल संसाधन विभाग में कार्यरत चौकीदार लरघुराम 30 नवंबर 2015 को रिटायर्ड हुए थे। रिटायर के समय उन्हें केवल 7,224 रुपए की बचत निधि का भुगतान किया गया था। इसके बाद पांच सालों तक न तो उनकी ग्रेच्युटी राशि का भुगतान हुआ और न ही उनका पेंशन मामला स्वीकार किया गया।
पहले दिए थे 3 हजार रुपए
ग्रेच्युटी और पेंशन की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए लरघुराम के बेटे लोचन सिंह ने विभाग के क्लर्क वीके सिन्हा से संपर्क किया। आरोप है कि लिपिक ने काम कराने के बदले खर्चा-पानी की मांग की, जिस पर लोचन सिंह ने 3 हजार रुपए दे दिए। इसके बावजूद कोई काम नहीं हुआ।
8 हजार मांगे, लेकिन 7 हजार में हुई डील
बाद में दोबारा मिलने पर वीके सिन्हा ने ग्रेच्युटी और पेंशन मामला तैयार करने के लिए 8 हजार रुपए रिश्वत मांगी। बातचीत के बाद सौदा 7 हजार रुपए में तय हुआ। इसके बाद लोचन ने एसीबी में शिकायत की। जांच में रिश्वत मांगने की पुष्टि होने पर आरोपी को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया।
रिटायरमेंट के बाद मिली सजा
मामले की सुनवाई के बाद विशेष न्यायाधीश ममता पटेल ने वीके सिन्हा को दोषी करार देते हुए 3 साल के सश्रम कारावास और 5 हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई है। बता दें कि मामले के दौरान वीके सिन्हा भी रिटायर्ड हो चुके हैं।

