रायपुर : कम अवधि में पकने वाली धान की किस्में अपनाकर किसान, पानी, लागत और समय बचा सकते हैं

  • देरी से मानसून और कम बारिश के बीच किसानों के लिए राहत की खबर

रायपुर (CITY HOT NEWS)//

एल नीनो के प्रभाव और कम बारिश के कारण नवांचल के बीजापुर जिले में खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो रही है। जिले में अब तक सामान्य से करीब 50 प्रतिशत ही वर्षा हुई है। ऐसी स्थिति में कृषि विभाग ने किसानों को कम अवधि और मध्यम अवधि में पकने वाली धान की किस्मों के साथ फसल विविधीकरण अपनाने की सलाह दी है।

          खेतों में नमी बनाए रखने और पानी की एक-एक बूँद के सही इस्तेमाल के लिए सरकार ड्रिप और स्प्रिंकलर (फव्वारा) सिंचाई पर 60 प्रतिशत से 80 प्रतिशत तक का अनुदान/ सब्सिडी प्रदान कर रही है। किसानों को सलाह दी गई है कि जो खेत पूरी तरह बारिश पर निर्भर हैं, वहां जल्दबाजी में धान की रोपाई न करके बारिश की अच्छी स्थिति देखकर ही कदम उठाएं। कृषि विभाग के अधिकारियों ने सलाह दी है कि किसानों को पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहने की बजाय कम पानी में तैयार होने वाली फसलों को अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि तिल और उड़द इस समय सबसे सुरक्षित और लाभकारी विकल्प बन सकते हैं। इसके अलावा जिन किसानों के पास सीमित सिंचाई सुविधा है, वे सब्जियों की खेती भी कर सकते हैं।

 90 से 130 दिन में पकने वाली धान की किस्मों की करें सीधी बुवाई

           कृषि विभाग ने किसानों को 90 से 110 दिन और 110 से 130 दिन में पकने वाली धान की किस्मों जैसे MTU-1010, IR-64, MTU-1156, MTU-1153, विक्रम और TCR की खुर्रा एवं सीधी बुवाई करने की सलाह दी है। सीधी बुवाई से करीब 20 प्रतिशत पानी की बचत होती है। साथ ही खेती की लागत लगभग 5 हजार रुपए प्रति एकड़ तक कम होती है और फसल सामान्य रोपाई की तुलना में 12 से 15 दिन पहले पक जाती है।

मरहान-टिकरा भूमि में धान के स्थान पर अन्य फसलों की करें खेती

          कृषि विभाग ने मरहान-टिकरा भूमि वाले किसानों को धान के स्थान पर कोदो, कुटकी, रागी, मूंग, उड़द, अरहर, मक्का और तिलहन जैसी कम पानी में होने वाली फसलों की खेती करने की सलाह दी है। फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा इस वर्ष कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत ऐसे किसानों को 15 हजार रुपए प्रति एकड़ की सहायता राशि प्रदान की जाएगी।

मल्चिंग से भूमि की नमी रहेगी सुरक्षित

         किसानों को आवश्यकता के अनुसार फसलों में मल्चिंग या पलवार का उपयोग करने की सलाह दी गई है। इससे भूमि की नमी लंबे समय तक बनी रहती है और फसलों को सूखे के प्रभाव से बचाने में मदद मिलती है। कृषि विभाग ने किसानों से फसल विविधीकरण अपनाने और केवल एक फसल पर निर्भर न रहने की अपील की है। इससे मौसम की अनिश्चितता के कारण होने वाले नुकसान का जोखिम कम किया जा सकता है।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से फसल को दें सुरक्षा कवच

        एल नीनो के प्रभाव से फसल नुकसान की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा के लिए किसानों से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अधिसूचित फसलों का बीमा कराने की अपील की गई है। अऋणी किसानों को बीमा कराने के लिए धान असिंचित के लिए 924 रुपए प्रति हेक्टेयर और धान सिंचित के लिए 1,056 रुपए प्रति हेक्टेयर प्रीमियम राशि जमा करनी होगी। अऋणी किसान नजदीकी लोक सेवा केंद्र, बैंक शाखा या ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी से संपर्क कर फसल बीमा करा सकते हैं। कृषि विभाग ने किसानों से मौसम की परिस्थितियों को देखते हुए कम अवधि वाली फसलों, फसल विविधीकरण, जल संरक्षण और फसल बीमा को अपनाने की अपील की है।

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