दुर्ग-भिलाई// दुर्ग जिले के बहुचर्चित एकतरफा प्रेम और जानलेवा हमले के मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने आरोपी ओमप्रकाश निर्मलकर उर्फ सोनू को दोषी करार देते हुए तीन वर्ष के सश्रम कारावास और एक हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई है।

न्यायालय ने माना कि आरोपी ने शादीशुदा महिला की हत्या करने के इरादे से उस पर पत्थर और धारदार कटर से हमला किया था।

पीड़िता ने जनवरी 2025 में नेवई थाने में शिकायत भी दर्ज कराई थी
अभियोजन पक्ष के अनुसार, पीड़िता अन्नू गायकवाड़ अपने पति से अलग होकर नेवईभाठा क्षेत्र में रह रही थीं। इसी दौरान क्षेत्र का निवासी ओमप्रकाश निर्मलकर उनसे एकतरफा प्रेम करने लगा। आरोपी लगातार उन्हें परेशान करता था। इस संबंध में अन्नू ने जनवरी 2025 में नेवई थाने में शिकायत भी दर्ज कराई थी। शिकायत के बाद आरोपी पीड़िता से रंजिश रखने लगा था।
ड्यूटी जाने निकली थी तब किया हमला
17 अप्रैल 2025 की सुबह करीब 6:30 बजे अन्नू गायकवाड़ काम पर जाने के लिए घर से निकली थीं। नेवई खदानपारा नर्सरी के पास आरोपी ने उनका रास्ता रोक लिया और एकतरफा प्रेम में असफल रहने की नाराजगी में हमला कर दिया। आरोपी ने पहले भारी पत्थर से महिला के सिर और चेहरे पर वार किया, फिर धारदार कटर से हमला कर गंभीर चोटें पहुंचाईं।
घटना में महिला गंभीर रूप से घायल हो गईं और उन्हें तत्काल इलाज के लिए जिला अस्पताल दुर्ग में भर्ती कराया गया। सूचना मिलने पर नेवई पुलिस ने अपराध दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने घटनास्थल से खून लगी मिट्टी, टूटी चूड़ियां और अन्य साक्ष्य जब्त किए।
12 गवाहों की गवाही बनी अहम सबूत
पुलिस ने 18 अप्रैल 2025 को आरोपी को गिरफ्तार किया। पूछताछ के दौरान आरोपी के मेमोरेंडम के आधार पर घटना में प्रयुक्त करीब पांच किलो का पत्थर और खून से सना कटर बरामद किया गया। फॉरेंसिक जांच में इन पर मानव रक्त मिलने की पुष्टि हुई।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पीड़िता अन्नू गायकवाड़, प्रत्यक्षदर्शी पायल यादव, पीड़िता की मां सुभिया टंडन सहित कुल 12 गवाहों को अदालत में पेश किया। मेडिकल रिपोर्ट और वैज्ञानिक साक्ष्यों ने अभियोजन के पक्ष को मजबूत किया।
कोर्ट ने कहा- हमला बेहद गंभीर था
सत्र न्यायाधीश के. विनोद कुजूर ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी ने महिला के सिर और चेहरे जैसे संवेदनशील अंगों पर हमला किया था। हमले की प्रकृति और परिस्थितियां स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं कि यदि पीड़िता की मृत्यु हो जाती तो आरोपी हत्या का दोषी होता।
अदालत ने आरोपी को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 118(2) के तहत दोषसिद्ध कर तीन वर्ष के सश्रम कारावास और एक हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। फैसले के बाद आरोपी को केंद्रीय कारागार दुर्ग भेज दिया गया।

