
- ग्राम चित्तरपुर के उन्नत किसान विजय शंकर ने नैनो यूरिया और डीएपी से खेती में रचा नया कीर्तिमान
- कृषि लागत में आई कमी, फसलों की पैदावार और गुणवत्ता में दर्ज हुई शानदार वृद्धि
अम्बिकापुर(CITY HOT NEWS)///
आधुनिक कृषि तकनीकों और नवाचारों को अपनाकर ग्रामीण भारत के किसान अपनी आय में वृद्धि कर रहे हैं। लुण्ड्रा विकासखंड के ग्राम पंचायत चित्तरपुर के प्रगतिशील कृषक, श्री विजय शंकर ने पारंपरिक खेती के तरीकों से आगे बढ़ते हुए श्नैनो यूरियाश् और डीएपीश् का सफल उपयोग कर अन्य किसानों के लिए एक बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत किया है।
लंबे समय से कृषि कार्य से जुड़े श्री विजय शंकर पिछले दो वर्षों से अपने खेतों में इन अत्याधुनिक तरल उर्वरकों का उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि इस नई तकनीक ने खेती को अत्यंत सुलभ और लाभकारी बना दिया है।
नैनो यूरिया-डीएपी का उपयोग आसान और किफायती
श्री विजय शंकर प्रधान ने बताया कि तरल नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी के उपयोग से खेती करना पहले की अपेक्षा अधिक आसान और किफायती हो गया है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक दानेदार उर्वरकों के छिड़काव में अधिक शारीरिक श्रम एवं बाहरी मजदूरों की आवश्यकता पड़ती थी, जबकि तरल उर्वरकों के उपयोग से यह निर्भरता समाप्त हो गई है। अब परिवार के सदस्य स्वयं आसानी से खेतों में इसका छिड़काव कर लेते हैं, जिससे श्रम एवं मजदूरी की बचत हो रही है।
उन्होंने बताया कि धान, आलू एवं गोभी की फसलों में तरल नैनो उर्वरकों के प्रयोग से फसलों की वृद्धि बेहतर हुई है तथा उपज की गुणवत्ता में भी सुधार देखने को मिला है। साथ ही दानेदार खाद की तुलना में नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी अधिक किफायती साबित हो रहे हैं, जिससे प्रति एकड़ कृषि लागत में कमी आई है। तरल रूप में होने के कारण इनका भंडारण, परिवहन एवं उपयोग भी सुविधाजनक है।
उन्नत तकनीक को अपनाने की अपील
अपने अनुभव साझा करते हुए श्री प्रधान ने कहा कि बेहतर परिणामों से उत्साहित होकर उन्होंने चालू कृषि सत्र में भी नैनो उर्वरकों का उपयोग जारी रखने का निर्णय लिया है। उन्होंने क्षेत्र के अन्य किसानों से भी आधुनिक कृषि तकनीकों एवं नैनो उर्वरकों को अपनाने की अपील करते हुए कहा कि इससे कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है तथा खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।

