
रायपुर(CITY HOT NEWS)//

छत्तीसगढ़ की पारंपरिक कृषि पहचान को सहेजने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए बलरामपुर जिले के ग्राम चांगरो में जीराफूल चावल की जैविक खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है। जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन ने गांव पहुंचकर किसानों तथा स्व-सहायता समूहों की महिलाओं से चर्चा की। उन्होंने जीराफूल की खेती को संगठित रूप देने, इसकी ब्रांडिंग करने और किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए विशेष कार्ययोजना बनाने का भरोसा दिलाया।
ग्रामीणों के साथ आत्मीय संवाद के दौरान जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने जमीन पर बैठकर किसानों के अनुभव सुने और पारंपरिक खेती को सहेजने के उनके प्रयासों की सराहना की। किसानों को रासायनिक खाद से दूरी बनाकर जैविक पद्धति अपनाने के लिए प्रेरित किया।उन्होंने कहा कि चांगरो का जीराफूल चावल क्षेत्र की अनमोल पहचान है। इसकी सुगंध और गुणवत्ता को जिले से आगे राज्य और देशभर में पहुंचाने के लिए हरसंभव सहयोग किया जाएगा।
जीराफूल पारंपरिक, सुगंधित और छोटे दाने वाली धान की किस्म है। इसके पतले दाने जीरे जैसे दिखते हैं, इसलिए इसका नाम जीराफूल पड़ा। मार्च 2019 में इसे जीआई टैग मिला। प्राकृतिक मिठास और मनमोहक सुगंध के लिए प्रसिद्ध यह चावल हल्का और सुपाच्य भी है। बाजार में इसकी कीमत लगभग 100 से 120 रुपये प्रति किलो तक है।
जिला प्रशासन ने बताया कि जीराफूल की बेहतर मार्केटिंग और उचित मूल्य सुनिश्चित करने के लिए किसानों के साथ मिलकर कार्ययोजना बनाई जाएगी। शंकरगढ़ क्षेत्र के लगभग 30 गांवों में इसकी खेती हो रही है। उत्पादन क्षेत्र का विस्तार करने के साथ चांगरो के जीराफूल चावल की प्रभावी ब्रांडिंग पर भी काम किया जाएगा। किसानों और इस कार्य से जुड़ी स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
चांगरो में जीराफूल की खेती से 10 स्व-सहायता समूह जुड़े हैं। प्रत्येक समूह में 12 से 15 महिलाएं कार्यरत हैं। समूहों को शंकरगढ़ स्थित आत्मनिर्भर बलरामपुर किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) से जोड़ने की पहल की जाएगी, जिससे किसानों को कम लागत पर गुणवत्तापूर्ण कृषि सामग्री और सेवाएं मिल सकें। स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण और बाजार सुविधा बढ़ाने के लिए राइस मिल तथा पारंपरिक लकड़ी की ढेंकी के आधुनिक स्वरूप इलेक्ट्रिक ढेंकी की स्थापना पर भी चर्चा की गई।
जीराफूल की जैविक खेती, संगठित विपणन और ब्रांडिंग से चांगरो के किसानों की पारंपरिक मेहनत को व्यापक पहचान मिलने के साथ उनकी आय बढ़ाने के नए अवसर तैयार होंगे। वहीं, स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को उत्पादन और प्रसंस्करण से जोड़कर स्थानीय आजीविका को भी मजबूती मिलेगी।

