रायपुर : अब मलेरिया नहीं बनेगा बस्तर की पहचान: 15 जून से शुरू हुआ ‘मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान’ का 14वां चरण

अब मलेरिया नहीं बनेगा बस्तर की पहचान
  • बस्तर संभाग सहित 10 जिलों के संवेदनशील क्षेत्रों में 16.20 लाख लोगों की होगी जांच, 2063 सर्वे दल पहुंचेंगे घर-घर

रायपुर (CITY HOT NEWS)//

बस्तर संभाग सहित 10 जिलों के संवेदनशील क्षेत्रों में 16.20 लाख लोगों की होगी जांच, 2063 सर्वे दल पहुंचेंगे घर-घर

कभी मलेरिया के सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्रों में गिने जाने वाले बस्तर अंचल की तस्वीर अब तेजी से बदल रही है। जिन गांवों में एक समय बरसात का मौसम आते ही मलेरिया का खतरा बढ़ जाता था, वहां अब लगातार चल रहे स्वास्थ्य अभियानों के कारण संक्रमण दर में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की जा रही है। यही वजह है कि छत्तीसगढ़ सरकार एक बार फिर व्यापक तैयारी के साथ ‘मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान’ के 14वें चरण की शुरुआत 15 जून से की गई । इस अभियान के माध्यम से न केवल संभावित संक्रमित व्यक्तियों की पहचान की जाएगी, बल्कि मलेरिया उन्मूलन की दिशा में अब तक मिली सफलता को और आगे बढ़ाने का प्रयास भी किया जाएगा।

बस्तर संभाग सहित 10 जिलों के संवेदनशील क्षेत्रों में 16.20 लाख लोगों की होगी जांच, 2063 सर्वे दल पहुंचेंगे घर-घर

राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित यह अभियान इस बार बस्तर संभाग के सातों जिलों-बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर, कांकेर और कोंडागांव के साथ-साथ गरियाबंद, कबीरधाम  तथा खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के संवेदनशील ग्रामों में संचालित किया जा रहा है । अभियान के तहत राज्य के 36 विकासखंडों के 697 उप स्वास्थ्य केंद्रों के अंतर्गत आने वाले 2476 गांवों में व्यापक सर्वेक्षण किया जाएगा तथा लगभग 16.20 लाख लोगों की मलेरिया जांच का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

दरअसल, छत्तीसगढ़ ने पिछले एक दशक में मलेरिया नियंत्रण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। वर्ष 2015 में बस्तर संभाग का वार्षिक परजीवी सूचकांक (एपीआई) 27.40 था, जो वर्ष 2025 में घटकर 6.98 पर पहुंच गया है। इसी अवधि में राज्य का एपीआई 5.21 से घटकर 0.90 हो गया है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2015 की तुलना में वर्ष 2025 में मलेरिया के कुल प्रकरणों में 80.09 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। यह उपलब्धि निरंतर चलाए गए चरणबद्ध अभियानों, घर-घर पहुंचकर जांच करने की रणनीति और समय पर उपचार उपलब्ध कराने के प्रयासों का परिणाम मानी जा रही है।

जनवरी 2026 में संचालित अभियान के 13वें चरण के परिणाम भी उत्साहजनक रहे हैं। उस चरण में मलेरिया धनात्मकता दर 4.60 प्रतिशत से घटकर मात्र 0.48 प्रतिशत रह गई। विशेषज्ञों के अनुसार यह कमी इस बात का संकेत है कि समुदाय आधारित निगरानी और सक्रिय रोगी खोज की रणनीति प्रभावी रूप से काम कर रही है।

अभियान के 14वें चरण को सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने व्यापक स्तर पर तैयारी की है। कुल 2063 सर्वे दलों का गठन किया गया है, जो गांव-गांव और घर-घर पहुंचकर बुखार से पीड़ित व्यक्तियों की पहचान करेंगे। आवश्यकता पड़ने पर त्वरित जांच किट के माध्यम से मलेरिया की जांच की जाएगी और संक्रमित पाए जाने वाले व्यक्तियों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही लोगों को मलेरिया से बचाव, मच्छर नियंत्रण तथा समय पर जांच और उपचार के प्रति जागरूक भी किया जाएगा।

स्कूलों, आश्रमों और छात्रावासों पर विशेष फोकस
इस बार अभियान में बच्चों और किशोरों की सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। इसके लिए 4420 स्कूलों, 346 छात्रावासों, 591 आश्रमों, 77 पोटाकेबिनों तथा 334 अर्धसैनिक बल शिविरों में अलग-अलग टीमों का गठन किया गया है। इन संस्थानों में रहने वाले विद्यार्थियों, कर्मचारियों और अन्य लोगों की जांच कर संक्रमण की प्रारंभिक अवस्था में ही पहचान सुनिश्चित की जाएगी, ताकि बीमारी के प्रसार को रोका जा सके।

 मलेरिया के खिलाफ लड़ाई केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें समुदाय की सक्रिय भागीदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। यही कारण है कि अभियान के दौरान सर्वे दलों को स्थानीय स्तर पर जनसहयोग प्राप्त हो, इसके लिए भी विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि यदि सर्वे दल उनके गांव या घर पहुंचे तो वे जांच में सहयोग करें तथा बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द या कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत जांच कराएं।

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