
रायपुर (CITY HOT NEWS)//
कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों और सही समय पर सही सरकारी योजनाओं का साथ मिल जाए, तो सीमित संसाधनों में भी सफलता की एक नई कहानी लिखी जा सकती है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है नारायणपुर जिले के ग्राम तेलसी निवासी एक छोटे किसान धरमू उसेंडी ने। कभी मौसम की बेरुखी और सिंचाई के संकट से जूझने वाले धरमू आज आधुनिक कृषि तकनीकों, बिजली की सुविधा और उन्नत खाद-बीज के बेहतर तालमेल से पूरे क्षेत्र के किसानों के लिए एक प्रेरणास्रोत बन चुके हैं।
पारंपरिक मजबूरी से आधुनिक आत्मनिर्भरता का सफर
धरमू उसेंडी के पास सीमित कृषि भूमि है। कुछ समय पहले तक उनकी पूरी खेती मानसूनी बारिश पर निर्भर थी। समय पर बारिश न होने या कम वर्षा के कारण फसलें खराब हो जाती थीं। सिंचाई के लिए केवल महंगे डीजल पंपों का सहारा था, जिससे खेती की लागत बढ़ जाती थी और मुनाफा न के बराबर होता था। धरमू की जिंदगी में असल बदलाव तब आया जब उन्हें शासन की योजना के तहत कृषि कार्य के लिए बिजली कनेक्शन मिला। बिजली मिलते ही धरमू ने अपने खेत में विद्युत चालित पंप स्थापित किया। इससे न सिर्फ डीजल का भारी खर्च बचा, बल्कि फसलों को समय पर पानी मिलना भी शुरू हो गया।
वैज्ञानिक खेती और शासन की योजनाओं का मिला साथ
नियमित सिंचाई की सुविधा मिलने के बाद धरमू ने कृषि विभाग का रुख किया। उन्होंने विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन में पारंपरिक खेती को छोड़कर वैज्ञानिक तौर-तरीकों को अपनाया। पारंपरिक बीजों की जगह उन्नत किस्म के बीजों का चयन किया। अंधाधुंध खाद डालने के बजाय संतुलित मात्रा में खादों का उपयोग शुरू किया।
समय पर बुवाई और बेहतर सिंचाई से फसलों की गुणवत्ता, लागत में कमी और उत्पादन दोनों में रिकॉर्ड सुधार हुआ। किसान धरमू उसेंडी कहते है कि पहले खेती सिर्फ परिवार पालने का एक जरिया थी, जिसमें हर वक्त नुकसान का डर रहता था। लेकिन जब से बिजली की सुविधा और कृषि विभाग से उन्नत खाद-बीज का मार्गदर्शन मिला है, फसलों का उत्पादन और मेरी आय दोनों बढ़ गए हैं।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए मिसाल
धरमू उसेंडी की यह सफलता केवल एक परिवार की खुशहाली तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस बात का जीता-जागता प्रमाण है कि सरकारी योजनाओं का जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल सकता है। आज धरमू अपने गांव तेलसी और आसपास के अन्य किसानों को भी आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनका यह दृढ़ विश्वास है कि यदि किसान सीमित भूमि में भी सरकारी सुविधाओं, उन्नत बीजों और सही सिंचाई प्रबंधन का उपयोग करें, तो खेती को एक बेहद मुनाफे वाले व्यवसाय में बदला जा सकता है।धरमू की मेहनत और शासन के सहयोग से उपजी यह कामयाबी नारायणपुर जिले में आत्मनिर्भर कृषि की दिशा में एक बेहद सराहनीय और अनुकरणीय कदम है।

