- आश्रम-छात्रावासों में एक्टिव सर्विलांस अभियान, पॉजिटिव मिले मरीजों का इलाज शुरू
रायपुर (CITY HOT NEWS)//
उत्तर बस्तर कांकेर जिले में मलेरिया को फैलने से रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने बड़े पैमाने पर अभियान छेड़ दिया है। जिले के सभी विकासखंडों में एक्टिव सर्विलांस (सक्रिय निगरानी) और सोर्स रिडक्शन का काम चल रहा है। साथ ही आश्रम और छात्रावासों में नियमित रूप से जाकर बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, जांच में जो भी मरीज पॉजिटिव मिले हैं, उन सभी का इलाज शुरू कर दिया गया है और नियमित फॉलोअप लिया जा रहा है।
बीते कुछ हफ्तों में जिले के हजारों बच्चों और ग्रामीणों की मलेरिया जांच की गई। विकासखंड कोयलीबेड़ा में 4 से 25 जुलाई के बीच 12 गांवों में 996 लोगों की जांच हुई, जिनमें से 116 मरीज मलेरिया पॉजिटिव पाए गए। इनका समूल उपचार कर दवा दी गई है। इसी विकासखंड के 30 छात्रावास और आश्रमों में 1546 छात्र-छात्राओं की जांच में 14 बच्चे पॉजिटिव मिले।
विकासखंड भानुप्रतापपुर में 9 से 26 जुलाई के दौरान 16 आश्रम-छात्रावासों के 866 बच्चों की जांच हुई, जिनमें 7 बच्चे पॉजिटिव पाए गए। बढ़ते मामलों को देखते हुए ग्राम धनेली में रैपिड फीवर सर्वे कराया गया, जहां 17 सकारात्मक प्रकरण सामने आए। इसके बाद ग्राम बोगर, चिल्हाटी, चपेला और सम्बलपुर में भी सर्वे कराया गया, जहां सभी रिपोर्ट निगेटिव रहीं।
विकासखंड अंतागढ़ के सभी 34 आश्रम-छात्रावासों में 1830 छात्र-छात्राओं की जांच में 36 मरीज, दुर्गूकोंदल के 26 आश्रम-छात्रावासों में 1860 बच्चों की जांच में 4 मरीज और कांकेर के 29 आश्रम-छात्रावासों में 2402 बच्चों की जांच में 11 मरीज पॉजिटिव मिले। इन सभी का उपचार जारी है।
वहीं चारामा विकासखंड में 15 आश्रम-छात्रावासों के 735 छात्रों और 9 गांवों के 283 लोगों की जांच में एक भी मरीज पॉजिटिव नहीं मिला। नरहरपुर में जुलाई माह में सभी 15 आश्रम-छात्रावासों का निरीक्षण करते हुए 448 छात्रों की जांच की गई, जो सभी निगेटिव रहे। यहां ष्मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ष् अभियान के तहत आयुष्मान आरोग्य मंदिर रावस, ठेमा, सारण्डा और बासनवाही के अंतर्गत आने वाले 14 गांवों में कुल 20 पॉजिटिव मरीजों का उपचार किया गया।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जिन गांवों में ष्मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ष् अभियान संचालित नहीं है, वहां एक भी मरीज पॉजिटिव मिलने पर तुरंत रैपिड फीवर सर्वे कराया जा रहा है। सभी बच्चों की जांच आरडी किट (RD Kit) से की जा रही है और निगेटिव पाए गए प्रकरणों की ब्लड स्लाइड बनाकर माइक्रोस्कोपी जांच के लिए प्रयोगशाला भेजी जा रही है, ताकि कोई मरीज छूट न जाए।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जिला उत्तर बस्तर कांकेर का कहना है कि सभी आश्रम-छात्रावासों की सतत निगरानी की जा रही है और मलेरिया को पूरी तरह नियंत्रित करने तक यह अभियान लगातार जारी रहेगा। लोगों से भी अपील की गई है कि बुखार आने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं और अपने आसपास पानी जमा न होने दें।

