
- समय पर बीमारी की पहचान और निःशुल्क उपचार से अब सामान्य जीवन जी रहा महासमुंद का दिगेंद्र, स्कूल जाने के साथ खेलने-कूदने लगा
रायपुर (CITY HOT NEWS)//
छत्तीसगढ़ में शासन की जनकल्याणकारी स्वास्थ्य योजनाएं जरूरतमंद बच्चों के लिए जीवन में नई उम्मीद लेकर आ रही हैं। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (चिरायु) के तहत समय पर बीमारी की पहचान, विशेषज्ञ उपचार और निरंतर फॉलोअप से महासमुंद जिले के ग्राम घुचापाली निवासी 7 वर्षीय दिगेंद्र नारंग को हृदय रोग से निजात मिली है। सफल हृदय ऑपरेशन के बाद दिगेंद्र अब स्वस्थ जीवन की ओर लौट चुका है। वह नियमित रूप से स्कूल जा रहा है और अन्य बच्चों की तरह खेल-कूद में भी हिस्सा ले रहा है।
दिगेंद्र नारंग, पिता श्री पूनम नारंग, लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानी से जूझ रहा था। हृदय रोग के कारण उसकी शारीरिक क्षमता प्रभावित हो रही थी। वह स्कूल जाने में असमर्थ था और थोड़ा सा खेलने या शारीरिक गतिविधि करने पर ही थक जाता था। उसकी बीमारी का असर उसके सामान्य जीवन के साथ-साथ परिवार की चिंता पर भी दिखाई देता था।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत चिरायु टीम बागबाहरा ने दिगेंद्र की स्वास्थ्य जांच की। आवश्यक परीक्षणों के दौरान उसके हृदय में बीमारी की पहचान हुई। स्थिति को देखते हुए चिरायु टीम ने उसे बेहतर उपचार के लिए उच्च स्वास्थ्य संस्था में रेफर किया। इसके बाद टीम ने परिवार को आवश्यक मार्गदर्शन देने के साथ उपचार की पूरी प्रक्रिया में समन्वय बनाए रखा, जिससे बच्चे को समय पर विशेषज्ञ उपचार मिल सका।
चिरायु टीम बागबाहरा के निरंतर प्रयास और समन्वय से दिगेंद्र का 19 अगस्त 2025 को रायपुर स्थित बालाजी हॉस्पिटल में निःशुल्क हृदय ऑपरेशन कराया गया। चिकित्सकों द्वारा पीटीएफई पैच के साथ वीएसडी क्लोजर एवं पल्मोनरी वाल्व रिप्लेसमेंट के साथ इंट्राकार्डिएक रिपेयर किया गया। ऑपरेशन सफल रहा और इसके बाद बच्चे के स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला।
उपचार के बाद दिगेंद्र के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। जो बच्चा बीमारी के कारण स्कूल जाने और सामान्य गतिविधियों में शामिल होने में कठिनाई महसूस करता था, वह अब नियमित रूप से स्कूल जा रहा है। वह स्वस्थ बच्चों की तरह खेल-कूद कर रहा है और रोजमर्रा की गतिविधियां सामान्य रूप से कर पा रहा है। बीमारी के कारण जिन गतिविधियों से उसे परेशानी होती थी, उनमें सुधार होने के साथ उसके चेहरे पर फिर से मुस्कान लौट आई है।
दिगेंद्र के परिवार के लिए यह उपचार राहत और उम्मीद की बड़ी वजह बना। निःशुल्क उपचार के माध्यम से बच्चे को बेहतर स्वास्थ्य मिला और परिवार पर महंगे हृदय उपचार का आर्थिक बोझ नहीं पड़ा। चिरायु टीम की समय पर पहचान, निरंतर मार्गदर्शन और समन्वित प्रयासों ने दिगेंद्र को स्वस्थ जीवन की राह पर लौटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (चिरायु) का उद्देश्य बच्चों में जन्मजात विकृतियों, बीमारियों, कमियों और विकास संबंधी समस्याओं की समय पर पहचान कर आवश्यक उपचार उपलब्ध कराना है। दिगेंद्र की कहानी इस बात का उदाहरण है कि समय पर स्वास्थ्य जांच और उपचार मिलने से बच्चों के जीवन में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। आज दिगेंद्र के लिए स्कूल, खेल का मैदान और सामान्य बचपन फिर से उसकी जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं।

