रायगढ़ में रिटायर्ड अधिकारी से 36.97 लाख की ठगी:राजस्थान से पकड़े गए महिला समेत 5 आरोपी, डिजिटल-अरेस्ट का डर दिखाकर वारदात को दिया अंजाम

रायगढ़// छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में बिजली विभाग के रिटायर्ड अधिकारी को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर ठगों ने 37 लाख रुपए ठग लिए। गिरोह ने फर्जी IPS और CBI अफसर बनकर घटना को अंजाम दिया। वारदात के बाद मामले की सूचना पर पुलिस ने राजस्थान से महिला समेत 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। यह मामला कोतवाली थाना क्षेत्र का है।

पुलिस ने ठगी करने वाले गिरोह को राजस्थान से गिरफ्तार किया है - Dainik Bhaskar

पुलिस ने ठगी करने वाले गिरोह को राजस्थान से गिरफ्तार किया है

मिली जानकारी के अनुसार, रायगढ़ के केसर परिसर में रहने वाले नरेंद्र ठाकुर (66 वर्ष) छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत परेषण कंपनी में सुपरवाइजर पद पर पोस्टेड थे और जनवरी 2022 में रिटायर हो चुके हैं।

उन्होंने 17 फरवरी 2026 को साइबर थाना में लिखित शिकायत देकर बताया कि उनके साथ करीब 36 लाख 97 हजार 117 रुपए की ठगी हुई है। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।

पीड़ित ने बताया कि 14 जनवरी 2026 को उनके मोबाइल पर एक अज्ञात महिला का फोन आया था। उसने खुद को टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया से जुड़ा बताया और कहा कि उनके पहचान पत्र का इस्तेमाल कर मोबाइल नंबर गलत कामों में इस्तेमाल हो रहा है।

इसके बाद कॉल को एक फर्जी टेलीकॉम अधिकारी और दिल्ली के बारह खंभा रोड पुलिस स्टेशन के नाम पर बात कर रहे व्यक्ति से कनेक्ट कर दिया गया। इन लोगों ने उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने और गिरफ्तारी की धमकी दी।

इसके बाद एक अन्य व्यक्ति ने वीडियो कॉल कर खुद को IPS अधिकारी नीरज ठाकुर बताया और उन्हें “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाया। आरोपी ने कहा कि उनके खिलाफ गंभीर मामला दर्ज है और उन्हें जांच में सहयोग करना होगा।

अलग-अलग खातों में रुपए ट्रांसफर कराए

ठगों ने पीड़ित से उसके बैंक खाते, संपत्ति और बाकी वित्तीय जानकारी ले ली। इसके बाद उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने के बाद पैसा वापस कर दिया जाएगा और इसी बहाने अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करवाते रहे।

धमकी और दबाव में आकर पीड़ित ने 30 जनवरी से 11 फरवरी 2026 के बीच कुल 36,97,117 रुपए अलग-अलग खातों में भेज दिए।

बाद में जब परिजनों को इसकी जानकारी हुई, तब उन्हें ठगी का पता चला। इसके बाद साइबर थाना की जांच में पीड़ित के करीब 2 लाख रुपए होल्ड करवा दिए गए।

आरोपियों के पास से मोबाईल, लैपटॉप व अन्य समाग्री जब्त किए गए

आरोपियों के पास से मोबाईल, लैपटॉप व अन्य समाग्री जब्त किए गए

पुलिस को जांच करने पर मिली जानकारी

इसके बाद पीड़ित की रिपोर्ट पर रायगढ़ साइबर थाने ने बैंक खातों और तकनीकी सबूतों के आधार पर जांच शुरू की।

जांच में पता चला कि पीड़ित द्वारा भेजे गए 4.50 लाख रुपए राजस्थान के भीलवाड़ा के बैंक खातों में जमा हुए हैं। इसके बाद बैंक डिटेल और तकनीकी जानकारी के जरिए आरोपियों की पहचान की गई।

पुलिस टीम राजस्थान पहुंची

बड़ी जानकारी मिलने के बाद SSP शशि मोहन सिंह के मार्गदर्शन में साइबर थाना प्रभारी विजय चेलक के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई गई और उसे भीलवाड़ा, राजस्थान भेजा गया।

वहां पुलिस टीम ने आरोपियों की तलाश शुरू की। जांच के दौरान बंधन बैंक, भीलवाड़ा के कर्मचारी राहुल व्यास की इस मामले में भूमिका सामने आई। इसके बाद उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिससे पूरे गिरोह का खुलासा हो गया।

अलग-अलग जगहों से आरोपियों को पकड़ा

पुलिस ने राहुल व्यास से पूछताछ की, जिसमें उसके गिरोह के अन्य आरोपियों के नाम सामने आए। इसके बाद पुलिस ने रविराज सिंह, उसकी पत्नी आरती राजपूत, संजय मीणा और गौरव व्यास को राजस्थान के अलग-अलग जगहों पर दबिश देकर हिरासत में लिया। सभी को ट्रांजिट रिमांड पर रायगढ़ लाया गया है।

राहुल व्यास वर्तमान में बंधन बैंक, भीलवाड़ा में काम करता है। उसने बताया कि उसकी 2007 में भीलवाड़ा के एक कॉलेज में पढ़ाई के दौरान आरती राजपूत से जान-पहचान हुई थी।

आरती राजपूत क्वालिटी एनालिस्ट और ऑनलाइन वेबसाइट बनाने का काम करती थी। उसके पति का नाम रविराज सिंह चव्हाण है।

संदिग्ध रुपए आने पर ठगों से जुड़ गए

करीब 3 साल पहले एक अलग नंबर से राहुल व्यास, आरती और रविराज के बैंक खातों में अचानक संदिग्ध तरीके से पैसे आने लगे। इसके बाद इन लोगों ने साइबर ठगों से संपर्क किया।

जब इनके खातों में लगातार बड़ी रकम आने लगी, तो इन्होंने वह पैसा वापस करने की बजाय खुद भी साइबर ठगी करने का प्लान बनाया और ठगों के साथ मिल गए।

इसके बाद इन्होंने अपने बैंक खाते साइबर ठगी के इस्तेमाल के लिए दे दिए। इन्होंने गूगल और अलग-अलग वेबसाइटों पर वीडियो देखकर साइबर ठगी करना भी सीखा।

ठगी में अपना खाता इस्तेमाल किया

इस दौरान आरोपियों ने कबूल किया कि रायगढ़ के एक व्यक्ति नरेंद्र ठाकुर से हुई 36.97 लाख रुपए की साइबर ठगी में उनके बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया था।

आरोपी राहुल ने यह भी स्वीकार किया कि उसके एचडीएफसी बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा के खातों में कुल 4.50 लाख रुपए आए थे। इसमें से 2.50 लाख रुपए उसने आरती राजपूत के कहने पर संजय मीणा को दे दिए थे।

जांच में आरोपियों के खाते में संदिग्ध रकम मिले

जांच के दौरान आरोपियों के मोबाइल के व्हाट्सऐप में कई कॉल रिकॉर्डिंग और चैट मिली, जिनसे पता चला कि उन्होंने मिलकर इस ठगी को अंजाम दिया है।

इसके अलावा जांच में सामने आया कि आरोपी गौरव व्यास के बैंक खाते में करीब 60 लाख रुपए की ठगी की रकम मिली है। वहीं अन्य आरोपियों के खातों में भी संदिग्ध पैसे पाए गए हैं।

देश भर में 1 करोड़ से अधिक की ठगी की

पुलिस ने सभी आरोपियों के बैंक खातों को सीज कर दिया है। साथ ही उनके पास से 7 मोबाइल फोन और 1 लैपटॉप जब्त किया गया है। जांच में यह भी सामने आया है कि इस गिरोह ने पूरे देश में करीब 1 करोड़ 40 लाख 77 हजार 300 रुपए की ठगी की है।

मामले में कुछ और लोगों की भी संलिप्तता के सबूत मिले हैं, जिनकी जांच की जा रही है। पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

किसी को OTP और बैंक डिटेल न दें

एसएसपी शशि मोहन सिंह ने बताया कि “डिजिटल अरेस्ट”, फर्जी CBI, पुलिस या टेलीकॉम अधिकारी बनकर आने वाले कॉल पूरी तरह साइबर ठगी हो सकते हैं।

उन्होंने कहा कि कोई भी जांच एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर पैसे ट्रांसफर करने के लिए नहीं कहती। ऐसे कॉल आने पर घबराना नहीं चाहिए और किसी को भी ओटीपी, बैंक डिटेल या पैसे की जानकारी नहीं देनी चाहिए।

अगर ऐसा कॉल आए तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें या नजदीकी साइबर थाने में जानकारी दें।

गिरफ्तार आरोपी

1. राहुल व्यास – निवासी सदर बाजार, गणेश मंदिर के पास, नहरी रायपुर, भीलवाड़ा (राजस्थान)

2. रविराज सिंह (27) – निवासी सिरोदनिया, थाना देवगढ़, जिला राजसमंद (राजस्थान) और शारदा 2 ड्रीम सिटी, सी-127, थाना गंगरार, जिला भीलवाड़ा (राजस्थान)

3. संजय मीणा (27) – निवासी 10 एस-11, पटेल नगर, थाना प्रतापनगर, जिला भीलवाड़ा (राजस्थान)

4. आरती राजपूत (26) – निवासी सिरोदनिया, थाना देवगढ़, जिला राजसमंद (राजस्थान) और शारदा ड्रीम सिटी, सी-127, थाना गंगरार, जिला भीलवाड़ा (राजस्थान)

5. गौरव व्यास (24) – निवासी 351/10, आई-सेक्टर, आजाद नगर, थाना प्रतापनगर, जिला भीलवाड़ा (राजस्थान)

Chhattisgarh