
- कृषक उन्नति योजना से मिला फसल विविधीकरण को प्रोत्साहन, डेढ़ एकड़ में अदरक और खेतों की मेड़ों पर अरहर की खेती
- कृषि विभाग के मार्गदर्शन से बदला खेती का तरीका, वैकल्पिक फसलों से बेहतर उत्पादन और अतिरिक्त आय की उम्मीद
- धान के स्थान पर वैकल्पिक खेती अपनाने पर प्रति एकड़ 15 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलने की जानकारी बनी बदलाव की प्रेरणा
रायपुर (CITY HOT NEWS)//
खेती में बदलाव का साहस और नई तकनीकों को अपनाने की सोच किसानों के लिए समृद्धि के नए रास्ते खोल रही है। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के लिए फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित किया जा रहा है। शासन की कृषक उन्नति योजना और कृषि विभाग के मार्गदर्शन से किसान पारंपरिक धान की खेती के साथ वैकल्पिक फसलों की ओर भी कदम बढ़ा रहे हैं। सरगुजा जिले के ग्राम दरिमा निवासी किसान श्री मुकंदर सिंह इसी बदलाव की प्रेरक मिसाल हैं। वर्षों से धान की खेती करने वाले मुकंदर सिंह ने इस खरीफ सीजन में अपने खेत में नया प्रयोग करते हुए लगभग डेढ़ एकड़ में अदरक की खेती की है और खेतों की मेड़ों पर अरहर लगाई है। वर्तमान में दोनों फसलें अच्छी स्थिति में हैं, जिससे उन्हें बेहतर उत्पादन और अतिरिक्त आय की उम्मीद है।
सेवा संकल्प अभियान-2026 के अंतर्गत मुकंदर सिंह की यह कहानी बताती है कि शासन की योजनाओं की सही जानकारी और कृषि विभाग का मार्गदर्शन मिलने से किसान अपनी परंपरागत खेती में बदलाव लाकर उपलब्ध भूमि और संसाधनों का बेहतर उपयोग कर सकते हैं। धान के स्थान पर अदरक और मेड़ों पर अरहर की खेती का उनका निर्णय न केवल फसल विविधीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है, बल्कि अन्य किसानों को भी खेती में नवाचार अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है।
कृषि विभाग की सलाह से बदली सोच, धान के स्थान पर अपनाई अदरक की खेती
अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम दरिमा निवासी किसान श्री मुकंदर सिंह, पिता श्री बरातु सिंह बताते हैं कि वे पहले अपने खेतों में धान की खेती करते थे। इस वर्ष खरीफ फसल की बुआई से पहले जब वे दरिमा समिति पहुंचे, तो वहां कृषि विभाग के अधिकारियों ने उन्हें फसल विविधीकरण के लाभ और धान के स्थान पर वैकल्पिक फसलें अपनाने की जानकारी दी। अधिकारियों ने अरहर, तिलहन सहित अन्य फसलों की खेती तथा कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत निर्धारित प्रावधानों के अनुसार मिलने वाली प्रोत्साहन राशि के बारे में भी बताया।
अधिकारियों से मिली जानकारी ने मुकंदर सिंह को खेती में कुछ नया करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने निर्णय लिया कि इस बार जिस भूमि पर पिछले वर्ष धान की खेती की थी, वहां अदरक की फसल लगाएंगे। इसके साथ ही खेतों की खाली मेड़ों का उपयोग अरहर की खेती के लिए करेंगे। कृषि विभाग की सलाह पर उन्होंने अपनी योजना को अमल में लाया और इस खरीफ सीजन में फसल विविधीकरण की दिशा में कदम बढ़ाया।
डेढ़ एकड़ में लहलहा रही अदरक की फसल, मेड़ों पर अरहर से अतिरिक्त उपज की उम्मीद
मुकंदर सिंह ने लगभग डेढ़ एकड़ कृषि भूमि में अदरक की खेती की है। इसके साथ खेतों की मेड़ों पर कृषि विभाग से प्राप्त अरहर के बीज लगाए हैं। इस पहल से उन्होंने उपलब्ध कृषि भूमि का बेहतर उपयोग करते हुए मुख्य फसल के साथ अतिरिक्त फसल उत्पादन की संभावना विकसित की है।
मुकंदर सिंह बताते हैं कि अदरक और अरहर दोनों फसलों की बढ़वार अच्छी हो रही है। खेत में लहलहाती फसलों को देखकर वे काफी उत्साहित हैं। पहले इसी भूमि पर केवल धान की खेती होती थी, लेकिन अब अदरक के साथ मेड़ों पर अरहर की फसल भी तैयार हो रही है। उन्हें उम्मीद है कि अदरक की अच्छी पैदावार के साथ अरहर से मिलने वाली अतिरिक्त उपज परिवार की आय बढ़ाने में सहायक होगी। खेती के इस नए प्रयोग ने उन्हें भविष्य में भी फसल विविधीकरण अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया है।
प्रति एकड़ 15 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि की जानकारी से मिला संबल
मुकंदर सिंह बताते हैं कि दरिमा समिति में कृषि विभाग के अधिकारियों ने उन्हें कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत धान के स्थान पर निर्धारित वैकल्पिक फसलों की खेती करने पर प्रति एकड़ 15 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलने की जानकारी दी थी। इस जानकारी ने उन्हें पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर अन्य फसलों को अपनाने का निर्णय लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनका कहना है कि खेती में बदलाव के दौरान किसानों को नई फसलों के उत्पादन और संभावित आर्थिक जोखिमों की चिंता रहती है। ऐसे में शासन की प्रोत्साहन योजनाएं किसानों का मनोबल बढ़ाती हैं। कृषि विभाग के मार्गदर्शन और प्रोत्साहन राशि की जानकारी से उन्हें वैकल्पिक खेती अपनाने का विश्वास मिला है। उन्हें उम्मीद है कि निर्धारित पात्रता एवं प्रावधानों के अनुरूप योजना का लाभ भी प्राप्त होगा।
अपनी फसल देखकर खुश हैं मुकंदर सिंह, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार
खेती में आए बदलाव को लेकर उत्साहित मुकंदर सिंह बताते हैं, ष्मैं ग्राम दरिमा का किसान हूं। पिछले वर्ष इस खेत में धान लगाया था। इस वर्ष कृषि विभाग के अधिकारियों की सलाह पर लगभग डेढ़ एकड़ में अदरक की खेती की है और मेड़ों पर अरहर लगाई है। अरहर के बीज भी कृषि विभाग से मिले हैं। अभी मेरी फसल बहुत अच्छी है। अधिकारियों ने बताया था कि धान के बदले दूसरी फसल लगाने पर प्रति एकड़ 15 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलेगी। मैं अपनी खेती से बहुत खुश हूं।
मुकंदर सिंह ने कहा कि कृषि विभाग से मिले मार्गदर्शन और शासन की योजना की जानकारी ने उन्हें खेती में नया प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया है। उन्होंने किसानों के हित में संचालित योजनाओं के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।
फसल विविधीकरण से किसानों के लिए खुल रहे समृद्धि के नए रास्ते
राज्य में कृषि विभाग द्वारा किसानों को धान की पारंपरिक खेती के साथ दलहन, तिलहन एवं अन्य वैकल्पिक फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। फसल विविधीकरण से किसानों को अपनी भूमि, जलवायु और उपलब्ध संसाधनों के अनुरूप फसलों का चयन करने का अवसर मिलता है। इससे एक ही फसल पर निर्भरता कम करने, कृषि भूमि का बेहतर उपयोग करने और आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित करने की संभावनाएं बढ़ती हैं।
सरगुजा के किसान मुकंदर सिंह की पहल इसी सकारात्मक बदलाव का उदाहरण है। कृषि विभाग के मार्गदर्शन और कृषक उन्नति योजना से मिली प्रेरणा के बल पर उन्होंने धान के स्थान पर अदरक और खेतों की मेड़ों पर अरहर की खेती अपनाई है। उनकी यह पहल दर्शाती है कि नई सोच, सही मार्गदर्शन और शासन की प्रोत्साहन योजनाओं के माध्यम से किसान खेती को अधिक विविधतापूर्ण और लाभकारी बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

