
- प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम से मिला 20 लाख रुपये का ऋण, इलेक्ट्रिक वाहन वर्कशॉप स्थापित कर उद्यमिता के क्षेत्र में बनाई पहचान
- खुद आत्मनिर्भर बनने के साथ दूसरों के लिए भी खोले रोजगार के द्वार, तकनीकी क्षेत्र में महिला उद्यमिता की बनीं मिसाल
- इंटरनेट से मिली योजना की जानकारी ने बदली जिंदगी, अब अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार के लिए कर रहीं प्रेरित
रायपुर (CITY HOT NEWS)//

कुछ नया करने का संकल्प, अपनी क्षमताओं पर विश्वास और शासन की योजना से मिला आर्थिक सहयोग किसी व्यक्ति को न केवल आत्मनिर्भर बना सकता है, बल्कि दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर सकता है। सरगुजा जिले के अम्बिकापुर की श्रीमती ममता शर्मा ने इसे साकार कर दिखाया है। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के तहत 20 लाख रुपये का ऋण लेकर उन्होंने इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) वर्कशॉप की स्थापना की। आज वे सफलतापूर्वक अपना व्यवसाय संचालित कर रही हैं और 6 से 7 लोगों को रोजगार भी उपलब्ध करा रही हैं। स्वयं के लिए स्वरोजगार का सपना लेकर शुरू हुआ उनका सफर अब दूसरों की आजीविका का सहारा बन गया है।
ममता शर्मा की यह सफलता महिला उद्यमिता और स्थानीय रोजगार सृजन का प्रेरक उदाहरण है। उन्होंने परंपरागत व्यवसायों से अलग तकनीक आधारित क्षेत्र में कदम रखकर अपनी पहचान बनाई है। इलेक्ट्रिक वाहनों की मरम्मत एवं सर्विसिंग से जुड़े व्यवसाय में उनकी पहल यह संदेश देती है कि सही अवसर और आर्थिक सहयोग मिलने पर महिलाएं नए तकनीकी क्षेत्रों में भी सफल उद्यम स्थापित कर सकती हैं।
इंटरनेट पर मिली योजना की जानकारी, 20 लाख रुपये के ऋण से शुरू किया व्यवसाय
ममता शर्मा बताती हैं कि वे लंबे समय से स्वयं का व्यवसाय शुरू करना चाहती थीं। उनके मन में कुछ अलग करने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की इच्छा थी, लेकिन उद्यम स्थापित करने के लिए आवश्यक पूंजी जुटाना एक बड़ी चुनौती थी। इसी दौरान उन्हें इंटरनेट के माध्यम से प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम की जानकारी मिली। योजना के तहत नए उद्यम स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराए जाने की जानकारी मिलने पर उन्होंने इसका लाभ लेने का निर्णय लिया।
ममता ने योजना के अंतर्गत आवेदन किया और उन्हें 20 लाख रुपये का ऋण प्राप्त हुआ। इस आर्थिक सहयोग से उन्होंने अम्बिकापुर में इलेक्ट्रिक वाहन वर्कशॉप स्थापित की। व्यवसाय शुरू होने के बाद उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से उसे आगे बढ़ाया। आज उनकी वर्कशॉप संचालित हो रही है और वे स्वयं उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं।
तकनीकी क्षेत्र में रखा कदम, इलेक्ट्रिक वाहन वर्कशॉप से बनाई अलग पहचान
इलेक्ट्रिक वाहनों का क्षेत्र आधुनिक तकनीक और नए व्यावसायिक अवसरों से जुड़ा हुआ है। ममता शर्मा ने इसी क्षेत्र में उद्यम स्थापित करने का निर्णय लेकर स्वरोजगार की नई राह चुनी। उन्होंने इलेक्ट्रिक वाहन वर्कशॉप की स्थापना कर तकनीकी सेवाओं से जुड़े व्यवसाय में कदम रखा। यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने ऐसे क्षेत्र को चुना, जहां तकनीकी जानकारी, व्यवसाय प्रबंधन और ग्राहकों को सेवाएं उपलब्ध कराने की क्षमता आवश्यक होती है।
ममता का अनुभव बताता है कि महिलाएं अपनी रुचि और क्षमता के अनुरूप नए क्षेत्रों में व्यवसाय शुरू कर सकती हैं। उनका उद्यम महिला सशक्तिकरण के साथ तकनीक आधारित स्वरोजगार की संभावनाओं को भी सामने लाता है।
स्वयं के लिए शुरू किया व्यवसाय, अब 6 से 7 परिवारों की आजीविका में योगदान
ममता शर्मा की सफलता की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि यह है कि उन्होंने स्वयं का व्यवसाय शुरू करने के साथ अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा किए हैं। उनकी इलेक्ट्रिक वाहन वर्कशॉप में वर्तमान में 6 से 7 लोगों को काम मिल रहा है। इस तरह उनका उद्यम केवल उनकी व्यक्तिगत आर्थिक आत्मनिर्भरता तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन का माध्यम भी बन गया है।
ममता बताती हैं कि स्वयं का व्यवसाय स्थापित कर दूसरों को रोजगार दे पाना उनके लिए बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने अपनी मेहनत से एक ऐसा उद्यम खड़ा किया है, जिससे वे स्वयं आर्थिक रूप से आगे बढ़ रही हैं और अन्य लोगों की आजीविका में भी योगदान दे रही हैं।
वित्तीय सहायता के साथ प्रशिक्षण और मार्गदर्शन भी महत्वपूर्ण
ममता शर्मा के अनुसार प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम नए उद्यमियों को स्वरोजगार शुरू करने का अवसर प्रदान करता है। योजना के माध्यम से वित्तीय सहायता के साथ उद्यमिता विकास से संबंधित प्रशिक्षण और मार्गदर्शन की व्यवस्था भी उपलब्ध है। व्यवसाय प्रबंधन, उद्यम संचालन और आर्थिक गतिविधियों को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने की जानकारी नए उद्यमियों के लिए उपयोगी होती है। इससे व्यवसाय शुरू करने के इच्छुक लोगों को अपनी योजना को वास्तविक उद्यम में बदलने की दिशा में सहयोग मिलता है।
ममता का मानना है कि महिलाओं को अपनी क्षमताओं पर विश्वास रखना चाहिए और उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाकर आगे बढ़ना चाहिए। स्वरोजगार के लिए इच्छुक महिलाएं शासन की योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर पात्रता के अनुसार उनका लाभ ले सकती हैं।
महिलाएं अपनी क्षमता पहचानें और स्वयं का व्यवसाय शुरू करने के लिए आगे आएं
ममता शर्मा अन्य महिलाओं को भी उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनका कहना है कि महिलाएं केवल पारंपरिक व्यवसायों तक सीमित न रहें, बल्कि अपनी रुचि, योग्यता और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार नए क्षेत्रों में भी अवसर तलाशें। वे बताती हैं कि शासन की योजनाओं की जानकारी प्राप्त करना स्वरोजगार की दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। सही जानकारी, आर्थिक सहयोग और निरंतर प्रयास से स्वयं का व्यवसाय स्थापित करने की राह आसान हो सकती है। ममता की सफलता उन महिलाओं के लिए प्रेरणादायक है, जो अपना काम शुरू करना चाहती हैं, लेकिन पूंजी की कमी या अवसरों की जानकारी नहीं होने के कारण आगे नहीं बढ़ पा रही हैं।
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार
ममता शर्मा ने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के माध्यम से मिले आर्थिक सहयोग के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि योजना से मिले ऋण ने उन्हें अपना व्यवसाय शुरू करने का अवसर दिया। आज वे इलेक्ट्रिक वाहन वर्कशॉप का संचालन कर रही हैं और अन्य लोगों को भी रोजगार उपलब्ध करा रही हैं। ममता ने महिलाओं से अपील की कि वे अपनी क्षमताओं को पहचानें, शासन की स्वरोजगार योजनाओं की जानकारी लें और आत्मनिर्भर बनने के लिए उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ें।
आत्मनिर्भरता से रोजगार सृजन तक, ममता की सफलता बनी प्रेरणा
सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत ममता शर्मा की कहानी दर्शाती है कि स्वरोजगार योजनाओं से मिलने वाला आर्थिक सहयोग किस प्रकार उद्यमिता और रोजगार सृजन का माध्यम बन सकता है। इंटरनेट से योजना की जानकारी प्राप्त करने से लेकर 20 लाख रुपये के ऋण से इलेक्ट्रिक वाहन वर्कशॉप स्थापित करने तक ममता ने अपने संकल्प को साकार किया है। आज उनका व्यवसाय न केवल उन्हें आर्थिक आत्मनिर्भरता प्रदान कर रहा है, बल्कि 6 से 7 अन्य लोगों को भी रोजगार उपलब्ध करा रहा है।
ममता शर्मा ने यह साबित किया है कि महिलाएं अवसर मिलने पर केवल स्वयं के लिए आजीविका का साधन विकसित नहीं करतीं, बल्कि रोजगार प्रदाता बनकर अन्य परिवारों की आर्थिक प्रगति में भी भागीदार बन सकती हैं। उनकी सफलता महिला उद्यमिता, आत्मनिर्भरता और स्थानीय रोजगार सृजन की प्रेरक मिसाल है।

