रायपुर : बाढ़ प्रभावितों की राहत और पुनर्वास के लिए प्रशासन के साथ समाज और स्कूली बच्चे भी आए आगे

 बाढ़ प्रभावितों की राहत और पुनर्वास के लिए प्रशासन के साथ समाज और स्कूली बच्चे भी आए आगे
  • कलेक्टर ने राहत शिविरों, क्षति सर्वेक्षण और स्वास्थ्य सुविधाओं की समीक्षा कर दिए आवश्यक निर्देश

रायपुर (CITY HOT NEWS)//

 बाढ़ प्रभावितों की राहत और पुनर्वास के लिए प्रशासन के साथ समाज और स्कूली बच्चे भी आए आगे
 बाढ़ प्रभावितों की राहत और पुनर्वास के लिए प्रशासन के साथ समाज और स्कूली बच्चे भी आए आगे

बस्तर संभाग में हाल ही में आई भीषण बाढ़ से प्रभावित परिवारों की सहायता और उनके पुनर्वास के लिए जिला प्रशासन बस्तर द्वारा राहत एवं बचाव कार्यों को लगातार प्राथमिकता के साथ संचालित किया जा रहा है। संकट की इस घड़ी में समाज के विभिन्न वर्ग भी सहयोग के लिए आगे आ रहे हैं। इसी क्रम में बस्तर जिले के दरभा विकासखंड के ग्राम छिंदबहार स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के विद्यार्थियों एवं शिक्षकों तथा उत्कल समाज बस्तर संभाग ने बाढ़ प्रभावितों की सहायता के लिए आर्थिक सहयोग प्रदान कर मानवीय संवेदना और सामाजिक एकजुटता की मिसाल पेश की है।
     कलेक्ट्रेट के प्रेरणा कक्ष में आयोजित समय-सीमा बैठक के दौरान छिंदबहार स्कूल के विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर श्री आकाश छिकारा से मुलाकात कर बाढ़ पीडि़तों की सहायता के लिए 5,001 रुपए की सहयोग राशि सौंपी। ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों और शिक्षकों की इस पहल की कलेक्टर ने सराहना करते हुए इसे संकट के समय सामूहिक संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी का प्रेरक उदाहरण बताया।
इसी तरह उत्कल समाज बस्तर संभाग ने भी मुख्यमंत्री बाढ़ आपदा राहत कोष में 21 हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की। समाज के प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर कलेक्टर श्री आकाश छिकारा को 21 हजार रुपए का चेक सौंपा। समाज ने राहत शिविरों के संचालन सहित अन्य आवश्यक राहत कार्यों में प्रशासन का सहयोग करने के उद्देश्य से यह राशि प्रदान की है। इस अवसर पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री तन्मय खन्ना, अपर कलेक्टर श्री सीपी बघेल एवं नगर निगम आयुक्त श्री प्रवीण वर्मा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने उत्कल समाज की इस पहल के लिए आभार व्यक्त किया।

राहत के बाद अब पुनर्वास पर विशेष जोर

कलेक्ट्रेट के प्रेरणा कक्ष में मंगलवार को आयोजित समय-सीमा बैठक में कलेक्टर श्री आकाश छिकारा ने जिले में आई भीषण बाढ़ के बाद राहत एवं पुनर्वास कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में राहत शिविरों की व्यवस्थाओं, क्षति सर्वेक्षण, स्वास्थ्य सुविधाओं, पेयजल एवं विद्युत व्यवस्था के साथ विभिन्न विभागों के लंबित प्रकरणों और आगामी शासकीय आयोजनों की भी समीक्षा की गई।
    कलेक्टर ने बाढ़ के दौरान जिला प्रशासन एवं एसडीआरएफ टीम द्वारा किए गए बचाव एवं राहत कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि अब रेस्क्यू के बाद प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाना और उनका पुनर्वास सुनिश्चित करना सर्वाेच्च प्राथमिकता है। उन्होंने राहत शिविरों में भोजन, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाओं की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए, ताकि प्रभावित नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
      उन्होंने राजस्व अमले को निर्देशित किया कि शासन की घोषणा के अनुरूप मकान, फसल, पशु क्षति एवं जनहानि का त्वरित सर्वेक्षण कर प्रकरण तैयार किए जाएं, ताकि प्रभावितों को नियमानुसार समय पर राहत एवं मुआवजा उपलब्ध कराया जा सके। दो दिन से अधिक समय तक जलभराव वाले क्षेत्रों में कपड़े एवं बर्तनों को हुए नुकसान के लिए निर्धारित राहत राशि स्वीकृत करने तथा क्षतिग्रस्त मकानों के पुनर्निर्माण के लिए निःशुल्क बांस-बल्ली उपलब्ध कराने के प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश भी दिए गए।

बाढ़ के बाद स्वास्थ्य सेवाओं को अलर्ट मोड पर रखने के निर्देश

        बाढ़ का पानी उतरने के बाद उत्पन्न होने वाली स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों को देखते हुए कलेक्टर ने स्वास्थ्य विभाग एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को अलर्ट मोड पर कार्य करने के निर्देश दिए। जलभराव वाले क्षेत्रों में डायरिया, पीलिया, टायफाइड, मलेरिया एवं चर्म रोग जैसी बीमारियों की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य दलों को घर-घर पहुंचकर निगरानी करने, क्लोरीन की गोलियां वितरित करने तथा ग्रामीणों को पानी उबालकर पीने के लिए जागरूक करने को कहा गया। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को क्षतिग्रस्त हैंडपंप एवं पाइपलाइनों की तत्काल मरम्मत कर शुद्ध एवं क्लोरीनेटेड पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। वहीं विद्युत विभाग को जलस्तर सामान्य हो चुके क्षेत्रों में सब-स्टेशनों एवं ट्रांसफार्मरों की जांच और आवश्यक मरम्मत कर विद्युत आपूर्ति शीघ्र बहाल करने के निर्देश दिए गए, ताकि प्रभावित क्षेत्रों में जनजीवन तेजी से सामान्य हो सके।

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