रायपुर (CITY HOT NEWS)//
वर्षों से जिस जमीन को अपना घर और जीवन का आधार मानकर परिवार पीढि़यों से वहां रह रहा था, उस जमीन का कोई वैधानिक आधार नहीं था। जमीन पर पूर्वजों की मौजूदगी थी, यादें थीं और कई पीढि़यों का जीवन था, लेकिन कागजों में उस अधिकार की स्पष्ट पहचान नहीं थी। यह स्थिति श्री भगवानलाल कुशवाहा के परिवार की थी, जो ग्राम अमहर जिला कोरिया में अपने पूर्वजों की जमीन पर करीब 100 वर्षों से अधिक समय से निवास कर रहे थे।
श्री भगवानलाल कुशवाहा, पिता स्वर्गीय श्री बीरसाय, बताते हैं कि उनके दादा के जमाने से उनका परिवार इसी स्थान पर रह रहा है। पीढि़यां गुजरती गईं, परिवार बढ़ता गया, लेकिन जमीन का पट्टा नहीं होने के कारण उनके मन में हमेशा यह चिंता बनी रहती थी कि जिस जमीन पर उनका परिवार वर्षों से रह रहा है, उसका कोई ठोस आधार उनके पास नहीं है।
वे कहते हैं, “पहले कई सालों से हमारी जमीन का कोई आधार नहीं था। अब पट्टा प्राप्त हो गया है तो बहुत अच्छा लगता है। अब लगता है कि हमारी जमीन को भी पहचान और अधिकार मिल गया है।”
भूस्वामित्व योजना के अंतर्गत श्री भगवानलाल कुशवाहा को 210 वर्ग मीटर भूमि का पट्टा प्राप्त हुआ। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी पहल और राज्य सरकार की मदद की वजह उनके पूर्वजों के 100 वर्ष से अधिक समय से काबिज जमीन को पट्टे के रूप में अधिकार मिला। यह उनके परिवार के लिए केवल एक दस्तावेज प्राप्त होने की बात नहीं, बल्कि पीढि़यों से चले आ रहे इंतजार के समाप्त होने का अवसर है।
पट्टा उनके हाथ में है तो वर्षों पुरानी अनिश्चितता की जगह विश्वास ने ले ली है। जिस जमीन को उनके परिवार ने पीढि़यों तक संभाला, अब उस पर उनके अधिकार को सरकारी दस्तावेज में भी पहचान मिली है।
श्री भगवानलाल कुशवाहा इस बदलाव के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के प्रति आभार व्यक्त करते हैं। उनके लिए यह पट्टा उस जमीन का कागज भर नहीं है, बल्कि उनके परिवार की वर्षों पुरानी पहचान, सुरक्षा और अधिकार का दस्तावेज है। कभी जिस जमीन पर सिर्फ पीढि़यों की यादें थीं, आज उसी जमीन पर अधिकार का दस्तावेज है।

