रायगढ़ // छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में शयेर ट्रेडिंग के नाम पर एक डाॅक्टर से 34.17 लाख की धोखाधड़ी की गई। इस मामले में पुलिस ने एक और आरोपी को इंदौर मध्यप्रदेश से गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपी को इंदौर न्यायालय से ट्रांजिट रिमांड प्राप्त कर रायगढ़ लाया है। इससे पहले इस गिरोह के 3 अन्य आरोपियों पर कार्रवाई की जा चुकी है। प्रकरण कोतवाली थाना क्षेत्र का है।
मिली जानकारी के मुताबिक 27 मई को सोनकरपारा, जूटमिल निवासी डॉ. दिलीप कुमार मिश्रा ने साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराई थी कि मार्च 2025 में मोबाइल फोन के माध्यम से उनका संपर्क सुनील नामक व्यक्ति से हुआ था।
उसने शेयर ट्रेडिंग में निवेश करने पर अत्यधिक लाभ मिलने का प्रलोभन देकर स्पार्टन ट्रेड कंपनी में निवेश करने के लिए प्रेरित किया। व्हाट्सऐप के माध्यम से कंपनी का पोर्टफोलियो भेजकर उन्हें निवेश पर अच्छा मुनाफा होने का भरोसा दिलाया गया।
इसके बाद अन्य व्यक्तियों ने भी अलग-अलग मोबाइल नंबरों से संपर्क कर उन्हें निवेश के लिए प्रेरित किया। इसके बाद 28 अप्रैल 2025 से 3 अप्रैल 2026 के बीच डाॅ दिलीप कुमार मिश्रा से कुल 34,17,531 विभिन्न खातों में निवेश कराया गया।
शुरुआत में पोर्टफोलियो में निवेश की रकम पर बढ़ता हुआ मुनाफा दिखाया जाता रहा, लेकिन जब डॉक्टर ने अपनी रकम निकालने की कोषिष की, तो उन्हें रकम वापस नहीं मिली। उल्टे उनसे और अधिक निवेश करने का दबाव बनाया जाने लगा। ठगी का एहसास होने पर उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत पर साइबर थाना में अपराध कायम कर जांच शुरू की गई। जहां पुलिस ने मामले की जांच की तो ज्योति मालवीय के नाम पर पंजीकृत मोबाइल नंबर से ठगी की कड़ियां जुड़ते हुए मिली। जांच में ज्योति मालवीय के नाम पर अन्य 23 मोबाइल सिम संचालित होने की जानकारी सामने आई।

आरोपी के पास से एक कार, मोबाइल, लैपटाॅप व नगर रकम जब्त किया
पूर्व में गिरोह के 3 आरोपी गिरफ्तार हो चुके पुलिस की टीम ने इंदौर के पलासिया क्षेत्र स्थित एक कॉल सेंटर में दबिश देकर तनिषा पाटिल को पकड़ा। इसके बाद विजय नगर क्षेत्र से ज्योति मालवीय और ज्योति से मिली जानकारी के आधार पर परदेशीपुरा क्षेत्र से तरुण नागर को गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय में पेश कर ट्रांजिट रिमांड की प्रक्रिया पूरी करने के बाद रायगढ़ लाया गया। पूछताछ में ज्योति मालवीय ने अपने आधार कार्ड से जारी सिम कार्ड साइबर ठगी के लिए गिरोह को उपलब्ध कराना स्वीकार किया।
उसने बताया कि सिम बेचने वाले तरुण नागर के संपर्क में रहकर करीब 100 से 150 सिम कार्ड गिरोह को उपलब्ध कराए थे।
आरोपी सिम कार्ड उपलब्ध कराता था वहीं तनिशा पाटिल ने भी साइबर ठगी के लिए गिरोह को सिम उपलब्ध कराया था। गिरोह का आरोपी रईस खान सिम कार्ड उपलब्ध कराने से लेकर शेयर मार्केट में ट्रेडिंग के नाम पर लोगों को निवेश की एडवाइजरी देने का काम करता था।
पूर्व में गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारी और लगातार विवेचना के आधार पर साइबर पुलिस की टीम गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी हुई थी।
आरोपी को इंदौर के कावेरी परिसर से गिरफ्तार किया इसी कड़ी में पुलिस टीम ने गिरोह के आरोपी रईस खान 31 साल निवासी कावेरी परिसर बी-1 को इंदौर के कावेरी परिसर से पकड़ा।
पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह पिछले करीब दो सालों से इंदौर में रहकर शेयर मार्केट में एडवाइजरी का काम कर रहा था।
मुंबई मुख्यालय वाली एक शेयर मार्केट ब्रोकिंग कंपनी में सब-ब्रोकर के रूप में कार्य करते हुए वह इंदौर में अपने साथी के साथ काम कर रहा था। ट्रेडिंग अकाउंट में पैसा लगाकर अधिक लाभ प्राप्त करने का प्रलोभन देकर लोगों को निवेश कराया जाता था।
डाॅक्टर को अधिक लाभ का प्रलोभन दिया
एडवाइजरी के काम में उपयोग के लिए उसे कई मोबाइल सिम कार्ड की आवश्यकता होती थी, जिसके लिए उसने तरुण नागर से करीब 100 से 150 सिम खरीदे थे। इन्हीं मोबाइल नंबरों का उपयोग लोगों से संपर्क कर डीमैट अकाउंट खुलवाने और ट्रेडिंग के नाम पर निवेश कराने में किया जाता था।
आरोपी रईस खान ने रायगढ़ के डॉक्टर दिलीप मिश्रा को 24 जून 2025 को चार बार फोन कर डीमैट अकाउंट खुलवाने और शेयर ट्रेडिंग में अधिक लाभ दिलाने का प्रलोभन दिया था। उसके झांसे में आकर डॉक्टर ने विभिन्न बैंक खातों में रकम ट्रांसफर की थी।
आरोपी से कार व लाखों रुपये जब्त आरोपी ने स्वीकार किया कि इसी तरह अन्य लोगों को भी ऑनलाइन ठगी का शिकार बनाकर प्राप्त रकम से उसने नवंबर 2025 में टाटा नेक्सॉन कार सहित मोबाइल और लैपटॉप खरीदे थे।
पुलिस ने आरोपी के कब्जे से ठगी की रकम से खरीदी गई टाटा नेक्सॉन कार, एक लैपटॉप, वनप्लस मोबाइल, रियलमी मोबाइल समेत कुल तीन मोबाइल फोन, दो ATM कार्ड, एक क्रेडिट कार्ड, आधार कार्ड व 1 लाख 39 हजार 500 रुपये जब्त करते हुए आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
अंजान व्यक्ति के कहने पर निवेश न करे SSP शशि मोहन सिंह ने बताया कि साइबर ठग शेयर ट्रेडिंग, निवेश और अधिक मुनाफे का लालच देकर लोगों की मेहनत की कमाई हड़पने के लिए संगठित नेटवर्क चला रहे हैं।
किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर निवेश न करें और बिना सत्यापन किसी को भी अपनी बैंकिंग जानकारी, ओटीपी या मोबाइल सिम उपलब्ध न कराएं। साइबर ठगी का शिकार होने पर तत्काल हेल्पलाइन नंबर 1930 अथवा साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।

