रायपुर : सेवा की कहानी: स्वच्छता से संवर रहा शहर, आत्मनिर्भर बन रहा परिवार

 स्वच्छता से संवर रहा शहर, आत्मनिर्भर बन रहा परिवार
  • श्रीमती प्रतिमा टोप्पो ने कचरा संग्रहण को बनाया रोजगार का जरिया, हर माह 12 से 15 हजार रुपये की आय

रायपुर (CITY HOT NEWS)//

 स्वच्छता से संवर रहा शहर, आत्मनिर्भर बन रहा परिवार

स्वच्छता केवल शहरों को साफ रखने का माध्यम नहीं, बल्कि आज यह अनेक परिवारों के लिए सम्मानजनक रोजगार और आत्मनिर्भरता का आधार भी बन रही है। बलरामपुर की श्रीमती प्रतिमा टोप्पो की कहानी इसका प्रेरक उदाहरण है। स्वच्छाग्रही के रूप में कार्य करते हुए वे घर-घर से कचरा एकत्र करती हैं, उसका पृथक्करण करती हैं और पुनर्चक्रण योग्य सामग्री को बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित कर रही हैं। स्वच्छता से जुड़ी इस सेवा ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

श्रीमती प्रतिमा टोप्पो प्रतिदिन रिक्शे से घर-घर पहुंचकर कचरा संग्रहण करती हैं। एकत्रित कचरे को सेग्रीगेशन शेड तक पहुंचाने के बाद वे उपयोगी एवं पुनर्चक्रण योग्य सामग्री को अलग करती हैं। इस सामग्री की बिक्री से उन्हें अतिरिक्त आमदनी प्राप्त होती है। उन्हें स्वच्छता कार्य के लिए लगभग 8 हजार रुपये मासिक मानदेय मिलता है, जबकि पुनर्चक्रण योग्य सामग्री की बिक्री से 4 से 5 हजार रुपये प्रतिमाह अतिरिक्त आय हो जाती है। इस प्रकार वे हर माह लगभग 12 से 15 हजार रुपये तक अर्जित कर रही हैं।

रोजगार से बढ़ा आत्मविश्वास, परिवार को मिला आर्थिक संबल
श्रीमती प्रतिमा टोप्पो बताती हैं कि पहले परिवार की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में कठिनाई होती थी। स्वच्छता कार्य से जुड़ने के बाद अब वे परिवार के राशन और अन्य जरूरी खर्चों में आर्थिक सहयोग कर पा रही हैं। अपने श्रम से होने वाली आय ने उनमें आत्मविश्वास बढ़ाया है और उन्हें अपने परिवार के लिए आर्थिक रूप से अधिक सक्षम बनाया है।

उनके लिए स्वच्छता का यह कार्य केवल रोजगार नहीं, बल्कि सम्मान के साथ आत्मनिर्भर बनने का अवसर है। वे जिस तरह नियमित रूप से अपने दायित्व का निर्वहन कर रही हैं, वह स्वच्छता के प्रति जिम्मेदारी और श्रम की गरिमा का भी उदाहरण है।

स्वच्छता अभियान से आजीविका और आत्मनिर्भरता को नई दिशा
श्रीमती प्रतिमा टोप्पो की यह कहानी बताती है कि स्वच्छता अभियान का प्रभाव केवल साफ-सुथरे शहर और मोहल्लों तक सीमित नहीं है। कचरे के उचित संग्रहण, पृथक्करण और पुनर्चक्रण से आजीविका के अवसर भी तैयार हो रहे हैं। विशेष रूप से महिलाएं स्वच्छता गतिविधियों से जुड़कर अपने परिवार की आर्थिक मजबूती में महत्वपूर्ण भागीदारी निभा रही हैं।

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