रायपुर : सेवा संकल्प अभियान : सेवा की कहानी: एक एकड़ नेट हाउस में करेला बीज उत्पादन से विवेक ने खोली बेहतर आमदनी की राह

सेवा संकल्प अभियान : सेवा की कहानी: एक एकड़ नेट हाउस में करेला बीज उत्पादन से विवेक ने खोली बेहतर आमदनी की राह
  • उद्यानिकी विभाग की सब्सिडी से तकनीक आधारित खेती को मिला सहारा, साल में दो सीजन कर रहे बीज उत्पादन
  • गर्मी के एक सीजन में चार से पांच लाख रुपये तक लाभ, बरसात में भी तीन से साढ़े तीन लाख रुपये तक की कमाई
  • सीमित जमीन पर संरक्षित खेती बनी आय बढ़ाने का जरिया, दूसरे किसानों को भी तकनीक अपनाने के लिए कर रहे प्रेरित

रायपुर (CITY HOT NEWS)//

खेती में आधुनिक तकनीक और शासकीय सहायता का साथ मिले तो सीमित कृषि भूमि भी बेहतर आमदनी का जरिया बन सकती है। सरगुजा जिले के बतौली विकासखंड की ग्राम पंचायत बिरीमकेला निवासी किसान विवेक गुप्ता ने इसे अपने खेत में साकार किया है। उद्यानिकी विभाग की सब्सिडी से एक एकड़ में स्थापित नेट हाउस में करेला बीज उत्पादन कर विवेक ने खेती को लाभकारी गतिविधि में बदला है। संरक्षित वातावरण में साल में दो सीजन बीज उत्पादन से उन्हें नियमित और बेहतर आमदनी मिल रही है।

एक एकड़ नेट हाउस में साल में दो सीजन बीज उत्पादन

विवेक बताते हैं कि वे नेट हाउस में वीएनआर कंपनी के लिए करेला बीज उत्पादन करते हैं। यहां गर्मी और बरसात के मौसम में साल में दो बार उत्पादन लिया जाता है। नेट हाउस चारों ओर से जाली से सुरक्षित रहता है, जिससे बाहरी परागण के प्रभाव को नियंत्रित कर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार बीज उत्पादन किया जाता है।

विवेक के अनुसार गर्मी के सीजन में एक एकड़ से लगभग ढाई से तीन क्विंटल तक करेला बीज का उत्पादन होता है। उत्पादित बीज के लिए उन्हें 2,150 रुपये प्रति किलो की दर मिलती है। निर्धारित गुणवत्ता के अनुरूप शत-प्रतिशत बीज मिलने पर 50 रुपये प्रति किलो अतिरिक्त बोनस का भी प्रावधान है।

एक सीजन में चार से पांच लाख रुपये तक का लाभ

विवेक बताते हैं कि गर्मी के एक सीजन में उत्पादन से जुड़े सभी खर्च निकालने के बाद लगभग चार से पांच लाख रुपये तक का लाभ मिल जाता है। बरसात के मौसम में उत्पादन अपेक्षाकृत कम रहता है, फिर भी करीब तीन से साढ़े तीन लाख रुपये तक लाभ प्राप्त हो जाता है।

उनके अनुसार दोनों सीजन में बेहतर तरीके से उत्पादन करने पर सभी खर्च निकालने के बाद सालभर में करीब पांच से सात लाख रुपये तक की आय अर्जित की जाती है। तकनीक आधारित खेती ने सीमित भूमि से बेहतर आर्थिक प्रतिफल प्राप्त करने का अवसर दिया है।

उद्यानिकी विभाग की सब्सिडी से स्थापित हुआ नेट हाउस

विवेक के लिए उद्यानिकी विभाग से मिली सब्सिडी तकनीक आधारित खेती से जुड़ने में महत्वपूर्ण सहारा बनी। विभागीय सहायता से एक एकड़ क्षेत्र में नेट हाउस स्थापित हुआ और उन्हें परंपरागत खेती से आगे बढ़कर संरक्षित वातावरण में बीज उत्पादन अपनाने का अवसर मिला।

विवेक का कहना है कि सीमित कृषि भूमि में भी सही तकनीक, मार्गदर्शन और मेहनत के माध्यम से बेहतर आमदनी प्राप्त की जा सकती है। वे अपने अनुभव के आधार पर अन्य किसानों को भी नेट हाउस, बीज उत्पादन और आधुनिक खेती की तकनीकों से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

तकनीक और शासकीय सहायता से आत्मनिर्भरता की ओर कदम

योजना के तहत मिली सहायता के लिए विवेक ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उनका कहना है कि अधिक से अधिक किसान शासकीय योजनाओं और आधुनिक कृषि तकनीकों का लाभ लेकर अपनी खेती को आगे बढ़ाने के साथ आमदनी बढ़ाकर आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बन सकते हैं।

सेवा संकल्प अभियान के तहत विवेक गुप्ता की यह ‘सेवा की कहानी’ खेती में तकनीक, शासकीय सहायता और किसान की मेहनत के समन्वय से आए बदलाव को सामने लाती है। एक एकड़ नेट हाउस में करेला बीज उत्पादन ने उनके लिए सीमित जमीन से बेहतर आमदनी की नई राह खोली है।

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