रायपुर : सेवा संकल्प अभियान-2026 : सेवा की कहानी: महज 1500 रुपये से शुरू किया व्यवसाय, अब सालाना दो लाख रुपये तक कमा रहीं जल कुमारी

सेवा की कहानी: महज 1500 रुपये से शुरू किया व्यवसाय, अब सालाना दो लाख रुपये तक कमा रहीं जल कुमारी
  • स्व-सहायता समूह से जुड़कर बदली जिंदगी, सूअर पालन से शुरू हुआ सफर किराना दुकान, आटा-धान चक्की और बकरी पालन तक पहुंचा
  • समूह से 70 हजार रुपये का ऋण लेकर बढ़ाया स्वरोजगार, अब 17 से 18 बकरियों का कर रहीं पालन
  • कभी बचत और बैंकिंग की नहीं थी जानकारी, आज सफल उद्यमी बनकर बच्चों को दिला रहीं बेहतर शिक्षा

रायपुर (CITY HOT NEWS)//

कभी परिवार की आर्थिक तंगी के कारण छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करना मुश्किल था। बचत और बैंकिंग की जानकारी भी नहीं थी, लेकिन आज वही महिला अपनी मेहनत, लगन और स्व-सहायता समूह के सहयोग से कई आजीविका गतिविधियां संचालित कर रही है। महज 1500 रुपये से सूअर पालन शुरू करने वाली श्रीमती जल कुमारी आज किराना दुकान, आटा-धान चक्की, सूअर पालन और बकरी पालन के माध्यम से सालाना लगभग डेढ़ से दो लाख रुपये की आमदनी अर्जित कर रही हैं। कभी आर्थिक कठिनाइयों से जूझने वाला उनका परिवार अब बेहतर स्थिति में है और वे अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिला पा रही हैं। जल कुमारी की यह सफलता दर्शाती है कि छोटी बचत, सही अवसर और निरंतर मेहनत से ग्रामीण महिलाएं आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम कर सकती हैं।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा ग्रामीण महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर बचत, स्वरोजगार और उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। समूहों के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों के लिए ऋण एवं आवश्यक सहयोग मिलने से वे अपनी क्षमता और स्थानीय संसाधनों के अनुरूप व्यवसाय विकसित कर रही हैं। सेवा संकल्प अभियान-2026 के अंतर्गत सामने आई जल कुमारी की कहानी महिला सशक्तिकरण की इसी पहल का प्रेरक उदाहरण है। उन्होंने एक छोटे व्यवसाय से शुरुआत कर धीरे-धीरे आजीविका के कई साधन विकसित किए और परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाया।

16 मार्च 2013 को समूह से जुड़कर शुरू किया आत्मनिर्भरता का सफर

जल कुमारी बताती हैं कि पहले उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी। उन्हें बचत के महत्व और बैंकिंग प्रक्रियाओं की जानकारी भी नहीं थी। आर्थिक संसाधनों के अभाव में स्वयं का व्यवसाय शुरू करना उनके लिए बड़ी चुनौती थी। इसी दौरान 16 मार्च 2013 को वे स्व-सहायता समूह से जुड़ीं। समूह की बैठकों और गतिविधियों के माध्यम से उन्हें नियमित बचत करने तथा उपलब्ध आर्थिक संसाधनों का उपयोग आजीविका बढ़ाने के लिए करने की जानकारी मिली। समूह से जुड़ना उनके जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव की शुरुआत साबित हुआ।

जल कुमारी ने समूह से मिले महज 1500 रुपये से सूअर पालन का व्यवसाय प्रारंभ किया। शुरुआत छोटी थी, लेकिन उन्होंने इसे मेहनत और नियमित देखभाल के साथ आगे बढ़ाया। धीरे-धीरे सूअर पालन उनकी आमदनी का महत्वपूर्ण साधन बन गया। वर्तमान में इस गतिविधि से उन्हें सालाना लगभग 30 से 35 हजार रुपये की आय प्राप्त हो रही है। इस शुरुआती सफलता ने उन्हें अन्य स्वरोजगार गतिविधियां अपनाने का आत्मविश्वास दिया।

70 हजार रुपये के ऋण से बढ़ाया व्यवसाय, किराना दुकान और चक्की बनीं आय का आधार

सूअर पालन से मिली सफलता के बाद जल कुमारी ने अपनी आजीविका को और मजबूत बनाने का निर्णय लिया। उन्होंने स्व-सहायता समूह के माध्यम से 70 हजार रुपये का ऋण प्राप्त किया और किराना दुकान शुरू की। इसके साथ ही आटा चक्की और धान चक्की भी स्थापित की। इन गतिविधियों से उन्हें आय के अतिरिक्त स्रोत मिले और परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलने लगी।

जल कुमारी ने केवल एक व्यवसाय पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग आजीविका गतिविधियों को अपनाया। किराना दुकान और चक्की के संचालन के साथ उन्होंने पशुपालन को भी आगे बढ़ाया। अतिरिक्त आय के उद्देश्य से दो बकरियों के साथ बकरी पालन शुरू किया। उनकी मेहनत और देखभाल से बकरियों की संख्या बढ़कर अब 17 से 18 तक पहुंच गई है। बकरी पालन से उन्हें सालाना लगभग 25 से 30 हजार रुपये की आमदनी प्राप्त हो रही है। इस प्रकार सूअर पालन, बकरी पालन, किराना दुकान और आटा-धान चक्की उनके परिवार की आजीविका के महत्वपूर्ण साधन बन गए हैं।


डेढ़ से दो लाख रुपये तक पहुंची सालाना आमदनी, बच्चों की शिक्षा को मिला संबल

जल कुमारी के अनुसार, विभिन्न आजीविका गतिविधियों से अब उनकी कुल वार्षिक आमदनी लगभग डेढ़ से दो लाख रुपये तक पहुंच गई है। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव आया है। पहले जहां घरेलू जरूरतों को पूरा करने में कठिनाई होती थी, वहीं अब व्यवसाय से मिलने वाली आय के कारण वे परिवार की जिम्मेदारियां बेहतर ढंग से निभा रही हैं। आर्थिक स्थिति में सुधार होने से बच्चों की पढ़ाई पर भी ध्यान दे पा रही हैं और उन्हें बेहतर शिक्षा दिलाने का प्रयास कर रही हैं।

स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद जल कुमारी के जीवन में केवल आर्थिक बदलाव ही नहीं आया, बल्कि बचत, बैंकिंग और व्यवसाय संचालन को लेकर उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है। पहले जिन आर्थिक गतिविधियों और बैंकिंग प्रक्रियाओं की उन्हें जानकारी नहीं थी, आज उन्हीं के माध्यम से वे अपने व्यवसाय को संचालित कर रही हैं। उनकी यह उपलब्धि बताती है कि महिलाओं को आर्थिक अवसर और मार्गदर्शन मिलने पर वे अपनी आजीविका के साधनों का विस्तार करने के साथ परिवार के भविष्य को भी बेहतर बना सकती हैं।

प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार, अन्य महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा

अपनी सफलता पर खुशी व्यक्त करते हुए जल कुमारी ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार जताया। उन्होंने बताया कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें बचत और स्वरोजगार के अवसरों की जानकारी मिली। समूह के सहयोग से उन्होंने छोटे स्तर पर व्यवसाय शुरू किया और धीरे-धीरे अन्य गतिविधियों को जोड़कर अपनी आमदनी बढ़ाई। आज वे आर्थिक रूप से पहले की तुलना में अधिक सक्षम हैं और परिवार की जरूरतों के साथ बच्चों की शिक्षा का खर्च भी उठा पा रही हैं।

सेवा संकल्प अभियान-2026 के अंतर्गत जल कुमारी की सफलता की कहानी ग्रामीण महिला सशक्तिकरण का प्रेरक उदाहरण है। महज 1500 रुपये से शुरू हुआ उनका स्वरोजगार आज कई आजीविका गतिविधियों तक पहुंच चुका है। समूह से मिले 70 हजार रुपये के ऋण का उपयोग कर उन्होंने व्यवसाय का विस्तार किया और अपनी सालाना आमदनी डेढ़ से दो लाख रुपये तक पहुंचाई। जल कुमारी का यह सफर दर्शाता है कि छोटी बचत, सामूहिक सहयोग और निरंतर मेहनत से महिलाएं न केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकती हैं, बल्कि अपने परिवार की खुशहाली और बच्चों के बेहतर भविष्य की मजबूत आधारशिला भी रख सकती हैं।

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