रायपुर : PMEGP से बढ़ई के हुनर को मिला नया मुकाम, लक्ष्मीनारायण बने आत्मनिर्भर

PMEGP से बढ़ई के हुनर को मिला नया मुकाम, लक्ष्मीनारायण बने आत्मनिर्भर
  • 35 प्रतिशत सब्सिडी और बैंक ऋण से खरीदी आधुनिक मशीनें, बढ़ी आय और रोजगार के अवसर

रायपुर (CITY HOT NEWS)//

प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) बढ़ई (कारपेंटर) और लकड़ी के काम से जुड़े कारीगरों को आधुनिक मशीनें खरीदने, बड़ी कार्यशाला बनाने और अपने पारंपरिक हुनर को एक नया व्यापारिक मुकाम देने के लिए 50 लाख रुपये तक का ऋण और 35% तक की सब्सिडी प्रदान करता है।

          प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) ग्रामीण क्षेत्रों के कारीगरों और छोटे उद्यमियों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है। इस योजना ने बीजापुर जिले के मद्देड़ निवासी श्री लक्ष्मीनारायण कुनारप के जीवन में बड़ा बदलाव लाया। वर्षों से बढ़ई का काम कर परिवार का पालन-पोषण करने वाले लक्ष्मीनारायण को PMEGP के तहत ऋण और सब्सिडी मिली, जिससे उन्होंने अपने व्यवसाय का विस्तार किया और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाया।

*पूंजी की कमी से रुका हुआ था काम*

         श्री लक्ष्मीनारायण लंबे समय से दरवाजे, खिड़कियां, फर्नीचर और लकड़ी से जुड़े अन्य निर्माण कार्य करते थे। लेकिन पर्याप्त पूंजी और आधुनिक मशीनों की कमी के कारण उनका काम सीमित था। बड़े ऑर्डर लेने और समय पर काम पूरा करने में कठिनाई होती थी, जिससे आय भी सीमित रहती थी।

*PMEGP से मिली आर्थिक मदद*

         प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम की जानकारी मिलने पर उन्होंने आवेदन किया। उनका आवेदन स्वीकृत हुआ और छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक, माड़ेड शाखा से उन्हें 1.50 लाख रुपये का ऋण मिला। इसके साथ ही उन्हें 35 प्रतिशत मार्जिन मनी सब्सिडी के रूप में लगभग 52 हजार रुपये का लाभ भी प्राप्त हुआ।

*आधुनिक मशीनों से बढ़ा व्यवसाय*

          योजना से मिली राशि से उन्होंने आधुनिक कारपेंट्री मशीनें और आवश्यक उपकरण खरीदे। नई मशीनों के उपयोग से उनके काम की गति, गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता में काफी सुधार हुआ। अब वे पहले की तुलना में अधिक काम कम समय में पूरा कर रहे हैं। आज वे अपने क्षेत्र में दरवाजे, खिड़कियां, फर्नीचर और अन्य लकड़ी के सामान का निर्माण सफलतापूर्वक कर रहे हैं। आसपास के गांवों और स्थानीय बाजार से उन्हें लगातार काम मिलने लगा है। इससे उनकी मासिक आय बढ़ी है और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।

*“योजना ने दिया नया आत्मविश्वास”*

        श्री लक्ष्मीनारायण कहते हैं कि च्डम्ळच् योजना ने उनके जीवन को नई दिशा दी है। पहले आधुनिक मशीनें खरीदना उनके लिए संभव नहीं था, लेकिन शासन की इस योजना और बैंक के सहयोग से उनका सपना पूरा हुआ। अब वे अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के साथ भविष्य में अन्य लोगों को भी रोजगार देने की दिशा में काम कर रहे हैं।
वे युवाओं और पारंपरिक कारीगरों से अपील करते हैं कि वे अपनी कला और कौशल के आधार पर स्वरोजगार शुरू करने के लिए शासन की योजनाओं का लाभ अवश्य उठाएं।

*हुनर और सरकारी सहयोग ने बदली जिंदगी*

          श्री लक्ष्मीनारायण कुनारप की कहानी बताती है कि यदि हुनर के साथ सही मार्गदर्शन और आर्थिक सहयोग मिल जाए, तो छोटा काम भी सफल व्यवसाय बन सकता है। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देकर लोगों की आय बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उनकी सफलता अन्य कारीगरों और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

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