
- राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से मिली नई राह, स्वरोजगार से सम्मानजनक आय कमा रहीं किशोरी
रायपुर (CITY HOT NEWS)//

बीजापुर जिले के ग्राम गंगालूर की निवासी किशोरी लकड़ा ने मेहनत, लगन और कौशल विकास के माध्यम से आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल पेश की है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत मिले प्रशिक्षण ने उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया और उन्हें स्वरोजगार का सफल अवसर प्रदान किया।
प्रशिक्षण में मिली आधुनिक फैशन डिजाइनिंग तथा ग्राहकों की पसंद के अनुरूप परिधान तैयार करने की बारीकियां
स्वयं सहायता समूह से जुड़ी किशोरी लकड़ा को एनआरएलएम के माध्यम से हैदराबाद में फैशन डिजाइनिंग एवं सिलाई का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिला। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने आधुनिक सिलाई तकनीक, फैशन डिजाइनिंग तथा ग्राहकों की पसंद के अनुरूप परिधान तैयार करने की बारीकियां सीखीं।
हुनर को बनाया आजीविका का साधन
प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद किशोरी ने अपने गांव में ही सिलाई कार्य शुरू किया। अपने कौशल और मेहनत के बल पर उन्होंने कम समय में लोगों का विश्वास हासिल किया और सिलाई कार्य को नियमित रोजगार का माध्यम बना लिया। अब तक वे लगभग 100 हितग्राहियों के लिए ब्लाउज सिलाई का कार्य कर चुकी हैं। प्रति ब्लाउज 350 रुपये की दर से उन्होंने लगभग 35 हजार रुपये की आय अर्जित की है। इस आय से उन्होंने अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के साथ-साथ आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है।
अन्य महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
किशोरी की सफलता से गांव की अन्य महिलाएं भी प्रेरित हो रही हैं। अब कई महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर कौशल प्रशिक्षण प्राप्त करने और स्वरोजगार शुरू करने के लिए आगे आ रही हैं। किशोरी का मानना है कि यदि महिलाओं को सही प्रशिक्षण, अवसर और मार्गदर्शन मिले तो वे आर्थिक रूप से सशक्त बनकर अपने परिवार और समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
कौशल विकास से खुल रहे आत्मनिर्भरता के द्वार
किशोरी लकड़ा की सफलता की कहानी इस बात का प्रमाण है कि शासकीय योजनाओं के माध्यम से प्राप्त कौशल प्रशिक्षण और दृढ़ संकल्प से ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकती हैं। उनकी उपलब्धि न केवल अन्य महिलाओं को प्रेरित कर रही है, बल्कि महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

