रायपुर (CITY HOT NEWS)//
रक्तदान को महादान कहा जाता है, क्योंकि यह ऐसा दान है जो किसी जरूरतमंद को नया जीवन दे सकता है। विश्व रक्तदाता दिवस के अवसर पर रक्तदान के महत्व को लेकर जागरूकता बढ़ाने और स्वैच्छिक रक्तदाताओं के प्रति सम्मान व्यक्त करने का संदेश दिया गया।
विशेषज्ञों के अनुसार, रक्त की एक यूनिट से कम से कम तीन लोगों की जान बचाई जा सकती है। रक्त को लाल रक्त कणिकाओं, प्लेटलेट्स और प्लाज्मा जैसे विभिन्न घटकों में विभाजित कर अलग-अलग मरीजों के उपचार में उपयोग किया जाता है। सड़क दुर्घटनाओं, बड़ी सर्जरी, प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव, थैलेसीमिया, कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए रक्त किसी जीवनरक्षक औषधि से कम नहीं है।
रक्तदान का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि आज तक रक्त का कोई कृत्रिम विकल्प विकसित नहीं हो सका है। ऐसे में स्वैच्छिक रक्तदाता ही अस्पतालों में जरूरतमंद मरीजों के लिए उम्मीद की सबसे बड़ी किरण बनते हैं।
चिकित्सकों का कहना है कि 18 से 65 वर्ष तक का स्वस्थ व्यक्ति निर्धारित मानकों के अनुसार रक्तदान कर सकता है। रक्तदान पूरी तरह सुरक्षित प्रक्रिया है और इससे शरीर पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता। कुछ ही समय में शरीर रक्त की कमी की भरपाई कर लेता है।
महाविद्यालयों, सामाजिक संस्थाओं और स्वयंसेवी संगठनों द्वारा आयोजित रक्तदान शिविरों में युवाओं की भागीदारी न केवल रक्त भंडार को मजबूत करती है, बल्कि समाज में सेवा और मानवीय संवेदनाओं को भी प्रोत्साहित करती है। विश्व रक्तदाता दिवस हमें यह संदेश देता है कि रक्त की आवश्यकता किसी भी समय किसी भी व्यक्ति को पड़ सकती है। ऐसे में प्रत्येक स्वस्थ नागरिक को नियमित और स्वैच्छिक रक्तदान का संकल्प लेना चाहिए।

