गर्भवती की मौत के बाद परिजनों और समाज के लोगों ने नेशनल हाईवे 130-C पर शव रखकर कर दिया चक्काजाम…अस्पताल पर लापरवाही का आरोप…अस्पताल का लाइसेंस रद्द करने और डॉक्टर पर कार्रवाई की मांग

गरियाबंद (छत्तीसगढ़)// गरियाबंद जिले के देवभोग में एक गर्भवती की मौत के बाद परिजनों और आदिवासी समाज के लोगों ने नेशनल हाईवे 130-C पर शव रखकर चक्काजाम कर दिया। यह घटना देवभोग स्थित देवमाता हॉस्पिटल में इलाज के दौरान हुई। जिसके बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया है।

जानकारी के अनुसार, 30 वर्षीय भानुमति मांझी को प्रसव के लिए देवमाता हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। प्रसव के करीब 12 घंटे के भीतर उनकी मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि, अस्पताल में समय पर उचित इलाज नहीं मिला, जिससे यूटरस फटने के कारण खून की कमी से उनकी जान चली गई।

महिला की मौत के बाद सड़क पर किया चक्काजाम

अस्पताल ने गंभीर हालत में उन्हें रेफर कर दिया था, जिसके बाद परिजन उन्हें ओडिशा के एक अस्पताल ले गए थे। महिला की मौत से आक्रोशित परिजनों ने शव को नेशनल हाईवे 130-C पर रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में घोर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण और आदिवासी समाज के लोग मौके पर जुट गए।

अस्पताल का लाइसेंस रद्द करने और डॉक्टर पर कार्रवाई की मांग

प्रदर्शनकारी अस्पताल का लाइसेंस रद्द करने, दोषी डॉक्टरों और कर्मचारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग पर अड़े रहे। चक्काजाम के कारण हाईवे पर वाहनों की लंबी कतार लग गई, जिससे यातायात बाधित हुआ।

घटना की सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। वे परिजनों और प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास कर रहे हैं ताकि जाम हटाया जा सके और स्थिति सामान्य हो।

परिजनों की सहमति से किया रेफर- डॉक्टर

वहीं, देवमाता अस्पताल प्रबंधन की ओर से डॉक्टर सागर गाटवाक ने बताया कि प्रसव के दौरान बच्चा फंस गया था। उन्होंने दावा किया कि परिजनों की सहमति के बाद ही प्रसूता को रेफर किया गया था।

डॉक्टर गाटवाक के अनुसार, शुरुआती इलाज के बाद उन्हें नजदीकी ओडिशा अस्पताल ले जाया गया था और परिजनों को समय पर खून चढ़वाने की सलाह दी गई थी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।

Chhattisgarh