
सक्ती वेंदाता पावर प्लांट में हुए हादसे में अब तक 21 मजदूरों की मौत हो चुकी है।
रायगढ़/सक्ती// छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में हुए वेदांता प्लांट हादसे में घायल 1 और मजदूर ने दम तोड़ दिया। मध्यप्रदेश के रहने वाले किस्मत अली रायपुर के निजी अस्पताल में एडमिट थे, जिनकी मौत हुई है। अब मृतकों की संख्या बढ़कर 21 हो गई है। हादसे में कुल 36 लोग झुलसे हैं, 15 घायलों का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज जारी है।
घटना के बाद वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल, प्रबंधन समेत 10 लोगों के खिलाफ डभरा थाने में FIR दर्ज हुई है। घटना के 24 घंटे बाद औद्योगिक सुरक्षा विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर हादसे की जांच की थी। जिसमें प्लांट प्रबंधन की गंभीर लापरवाही सामने आई है।
शुरुआती जांच के मुताबिक, प्रोडक्शन दोगुना करने की जल्दबाजी में बॉयलर फटा। चेतावनी के बाद भी काम नहीं रोका गया। इसके अलावा मशीनों के रखरखाव और संचालन में लापरवाही बरती गई। इसी आधार पर केस दर्ज किया गया है।
घटना से जुड़ी ये तस्वीरें देखिए…

सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में 14 अप्रैल दोपहर 2 बजे बॉयलर ब्लास्ट हुआ था।

बॉयलर ब्लास्ट के बाद 4 मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई थी।

रायपुर के निजी अस्पताल में इलाज के दौरान किस्मत अली ने दम तोड़ दिया।

पीसीसी चीफ और कांग्रेस नेताओ ने भी घायलों से मुलाकात की।

कंपनी के चेयरमैन अनिल अग्रवाल पर भी FIR हुई है।

FIR दर्ज होने के बाद पूर्व सीएम भूपेश बघेल का ट्वीट।
ज्यादा फ्यूल जमा होने के कारण प्रेशर बना
औद्योगिक सुरक्षा विभाग के बॉयलर इंस्पेक्टर उज्जवल गुप्ता और उनकी टीम ने बुधवार को लगभग 6 घंटे तक घटना स्थल की जांच की। शाम 8 बजे रिपोर्ट एसपी प्रफुल्ल ठाकुर को सौंपी गई। जांच में सामने आया कि बॉयलर फर्नेस के अंदर ज्यादा मात्रा में फ्यूल जमा हो जाने के कारण तेज प्रेशर बना।
दबाव के कारण बॉयलर का निचला पाइप अपनी निर्धारित स्थिति से हट गया। जिस वजह से ब्लास्ट हुआ। FSL की रिपोर्ट में भी यही कारण बताया गया है। जांच में यह भी पाया गया कि मशीनों के रखरखाव और संचालन में लापरवाही बरती गई। एसपी के निर्देश पर एएसपी पंकज पटेल के नेतृत्व में एक टीम बनाई गई है, जो पूरे मामले की जांच कर रही है।

दबाव 1 से 2 सेकेंड के अंदर बढ़ा
विभाग के अनुसार, हादसा 14 अप्रैल को दोपहर 2:33 बजे हुआ। उस समय 2028 टीपीएच क्षमता वाले विशाल वाटर ट्यूब बॉयलर में फर्नेस प्रेशर (भट्ठी का दबाव) तेजी से बढ़ा। यह दबाव 1 से 2 सेकेंड के अंदर बढ़ा, जिससे सिस्टम को बंद करना या किसी तकनीकी खराबी को रोकना संभव नहीं था।
दबाव इतना तेज था कि अंदरूनी विस्फोट हुआ और इसकी चपेट में बाहरी पाइपलाइन भी आ गई। जांच में सामने आया है कि, 1 घंटे में दोगुना उत्पादन करने के लिए बॉयलर का लोड तेजी से बढ़ाया गया। लोड 350 मेगावाट से बढ़ाकर लगभग 590 मेगावाट किया गया। यह वृद्धि बहुत कम समय में की गई।

इसके साथ ही पीए फैन में बार-बार खराबी, अनबर्न फ्यूल से प्रेशर बनना, पाइपिंग सिस्टम का फेल होना और बेकअप का समय पर काम नहीं करने का भी जिक्र है। कलेक्टर अमृत विकास टोपनो ने भी मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। 30 दिन के अंदर इसकी रिपोर्ट भी मांगी गई है।

इन बिंदुओं पर होगी मजिस्ट्रियल जांच
- घटना कब और कैसे हुई
- घटना के लिए कौन जिम्मेदार हैं
- घटना का तकनीकी या मानवीय क्या कारण है
- हादसे वाले दिन कौन-कौन मजदूर कार्यरत थे, किनकी मौत हुई, कौन घायल हुए
- प्रशासनिक अधिकारियों ने कब कब प्लांट का निरीक्षण किया, क्या कोई खामियां मिली थी, यदि हां तो क्या कार्रवाई की गई
- भविष्य में इस प्रकार की घटना ना हो, इस रोकने के उपाय और सुझाव

ग्राफिक से समझें बॉयलर कैसे करता है काम

मृतकों के परिजनों को मिलेगा मुआवजा
वेदांता प्रबंधन ने मृतक परिजन को 35-35 लाख रुपए सहायता राशि और नौकरी देने का ऐलान किया है। घायलों को 15-15 लाख रुपए दिए जाएंगे। इससे पहले PMO ने मुआवजे की घोषणा की थी।
PMNRF से हर मृतकों के परिवार वालों को 2 लाख रुपए और घायलों को 50 हजार रुपए दिए जाएंगे। छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से मृतकों के परिवार वालों को 5-5 लाख और घायलों को 50 हजार रुपए दिए जाएंगे।

