दुर्ग-भिलाई// दुर्ग जिले के पाटन न्यायालय ने पिता की हत्या के मामले में बेटे को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। ग्राम गाड़ाडीह में दिवाली के दौरान परिवार में हुए विवाद के बाद चुन्नी लाल यदु के सिर में गंभीर चोट आई थी। इलाज के दौरान 29 अक्टूबर 2025 को उनकी मौत हो गई थी।

मामले में अपर सत्र न्यायाधीश दुलार सिंह निर्मलकर ने 16 अक्टूबर 2026 को फैसला सुनाते हुए आरोपी डोमन लाल यदु (42) को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103 के तहत दोषी ठहराया। अदालत ने उस पर 1,000 रुपए का अर्थदंड भी लगाया है। जुर्माना नहीं चुकाने पर उसे पांच महीने का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।

दिवाली के दौरान परिवार में हुआ था विवाद
अभियोजन के अनुसार, घटना 21 अक्टूबर 2025 को ग्राम गाड़ाडीह में हुई थी। आरोपी डोमन लाल यदु, मृतक चुन्नी लाल यदु का बेटा है। परिवार के सदस्य एक ही मकान में अलग-अलग कमरों में रहते थे और आंगन साझा था।
अभियोजन की कहानी के मुताबिक, आरोपी और उसके भाई भूपेश यदु के बीच विवाद हुआ था। चुन्नी लाल बीच-बचाव करने पहुंचे थे। इसी दौरान उनके सिर पर टंगिया से वार किए जाने का आरोप लगा। आरोपी की भाभी और मृतक की बहू शैलेन्द्री यदु ने भी बीच-बचाव किया था, जिससे उनके हाथ में चोट आई थी।

इलाज के दौरान हुई थी मौत
घटना के बाद चुन्नी लाल को इलाज के लिए भिलाई के अस्पताल में भर्ती कराया गया। 29 अक्टूबर 2025 को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर डॉ. कल्याण कुमार सिंघा ने कोर्ट में बताया कि चुन्नी लाल की खोपड़ी के बाएं हिस्से में फ्रैक्चर था। सिर के अंदर काफी खून बहा था और खून के थक्के भी मिले थे। डॉक्टर ने बताया कि सिर में गंभीर चोट लगने से मौत हुई थी।
परिवार के गवाहों ने टंगिया से हमले की बात नहीं मानी
सुनवाई के दौरान शैलेन्द्री यदु, सरस्वती यदु, धरमजीत यदु और भूपेश यदु ने कोर्ट में कहा कि चोट लोहे की चादर गिरने से लगी थी। उन्होंने टंगिया से हमला किए जाने की बात का समर्थन नहीं किया।
आरोपी के वकील ने इसी आधार पर उसे बरी करने की मांग की। बचाव पक्ष का कहना था कि चोट लोहे की चादर गिरने से लगी थी। उसने पुलिस की जांच और जब्ती की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए।

टंगिया और कपड़ों पर मिला था इंसानी खून
अभियोजन पक्ष ने कोर्ट में बताया कि घटना के बाद जब्त की गई टंगिया और आरोपी के कपड़ों पर इंसानी खून मिला था। मृतक और घायल के कपड़ों से जुड़े सबूत और जांच रिपोर्ट भी कोर्ट में पेश की गई।
कोर्ट ने सभी सबूतों को देखने के बाद माना कि आरोपी घटना के समय मौके पर मौजूद था और परिवार में विवाद भी हुआ था। अदालत के मुताबिक, लोहे की चादर गिरने से चोट लगने की बात के समर्थन में बचाव पक्ष कोई स्वतंत्र सबूत पेश नहीं कर सका। दूसरे सबूतों और जांच रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने हत्या का आरोप साबित माना।
हत्या में दोषी, चार अन्य आरोपों से बरी
कोर्ट ने डोमन लाल यदु को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103 के तहत हत्या का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद और 1 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं, धारा 331(6), 296, 351(3) और 118(1) के तहत लगाए गए चार अन्य आरोप साबित नहीं होने पर उसे इनसे बरी कर दिया गया।
अदालती रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी 23 अक्टूबर 2025 से 28 मार्च 2026 तक 156 दिन हिरासत में रहा था। कोर्ट ने उसे सजा काटने के लिए दुर्ग केंद्रीय जेल भेजने का आदेश दिया।

