सेवा की कहानी : नदी और दुर्गम रास्तों की बाधा पार कर पहुंची मातृत्व की सौगात, शशिकला गोटे को मिला प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का लाभ

बीजापुर : सेवा की कहानी : नदी और दुर्गम रास्तों की बाधा पार कर पहुंची मातृत्व की सौगात, शशिकला गोटे को मिला प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का लाभ
  • दूरस्थ ग्राम कोंगोपल्ली में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की संवेदनशील पहल से गर्भवती महिला को मिली 5 हजार रुपए की सहायता राशि
  • घर पहुंचकर कराया पंजीयन, बिना भागदौड़ शशिकला को मिला योजना का लाभ, सुरक्षित मातृत्व की राह हुई आसान

बीजापुर, (CITY HOT NEWS)///

छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के सुदूर वनांचलों में शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं जरूरतमंद परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और आवागमन की चुनौतियों के बावजूद महिला एवं बाल विकास विभाग के मैदानी अमले की सक्रियता से गर्भवती महिलाओं तक मातृत्व सुरक्षा योजनाओं का लाभ पहुंच रहा है। इसकी प्रेरक मिसाल पामगल सेक्टर के दूरस्थ ग्राम कोंगोपल्ली की निवासी श्रीमती शशिकला गोटे हैं, जिन्हें प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के अंतर्गत 5 हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्राप्त हुई है।

नदी पार बसे गांव में आंगनबाड़ी दीदी बनीं मददगार

ग्राम कोंगोपल्ली बीजापुर जिले का एक ऐसा दूरस्थ गांव है, जहां पहुंचने के लिए नदी पार करनी पड़ती है। विशेषकर बरसात के मौसम में नदी का जलस्तर बढ़ने से आवागमन बाधित हो जाता है। ऐसी परिस्थितियों में गर्भवती महिलाओं तक स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी सेवाएं समय पर पहुंचाना चुनौतीपूर्ण होता है।

इन्हीं चुनौतियों के बीच पामगल सेक्टर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने अपने कर्तव्यों के प्रति संवेदनशीलता और समर्पण का परिचय देते हुए शशिकला गोटे तक प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का लाभ पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

शशिकला की गर्भावस्था की जानकारी मिलते ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ता उनके घर पहुंचीं और योजना के अंतर्गत मिलने वाली आर्थिक सहायता, पात्रता एवं आवश्यक दस्तावेजों के संबंध में विस्तार से जानकारी दी।

घर बैठे पूरी हुई प्रक्रिया, समय पर मिला योजना का लाभ

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने शशिकला के आवश्यक दस्तावेजों की जांच कर आवेदन संबंधी औपचारिकताएं पूरी कराने में सहयोग किया। इसके बाद स्वयं सेक्टर मुख्यालय पामगल पहुंचकर प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के पोर्टल पर उनका ऑनलाइन पंजीयन सुनिश्चित कराया।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के सतत प्रयास एवं नियमित फॉलोअप से शशिकला का आवेदन निर्धारित समय-सीमा में स्वीकार हुआ और उन्हें योजना के अंतर्गत 5 हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्राप्त हुई।

इस पहल की विशेष बात यह रही कि दूरस्थ गांव में निवासरत शशिकला को योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए बार-बार शासकीय कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़े।
5 हजार रुपए की सहायता से पोषण और स्वास्थ्य देखभाल में मिली मदद

प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना से प्राप्त आर्थिक सहायता शशिकला के लिए गर्भावस्था के दौरान महत्वपूर्ण सहारा बनी। उन्होंने सहायता राशि का उपयोग पौष्टिक आहार एवं आवश्यक दवाइयों की व्यवस्था में किया।
योजना से मिली सहायता ने उन्हें गर्भावस्था के दौरान स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद की है।

 आंगनबाड़ी दीदी के प्रयासों से शशिकला के चेहरे पर आई मुस्कान

योजना का लाभ मिलने पर शशिकला गोटे ने खुशी व्यक्त करते हुए बताया कि उनका गांव दूरस्थ क्षेत्र में स्थित है, जहां से बाहर आना-जाना आसान नहीं है। विशेषकर बरसात के दिनों में आवागमन की कठिनाइयां और बढ़ जाती हैं।

शशिकला ने कहा, “हमारे गांव से बाहर जाना आसान नहीं है, खासकर बरसात में। मुझे योजना की जानकारी नहीं थी। आंगनबाड़ी दीदी ने घर आकर समझाया, समय पर मेरा फॉर्म भरवाया और लगातार सहयोग किया। इससे मुझे बिना भागदौड़ के योजना का लाभ मिल सका।

उन्होंने योजना के माध्यम से मिली आर्थिक सहायता एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।

अंतिम छोर की माताओं तक पहुंच रही शासन की संवेदनशील पहल

प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना गर्भवती एवं धात्री माताओं के स्वास्थ्य, पोषण और मातृत्व सुरक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। विशेष रूप से बीजापुर जैसे दूरस्थ एवं आदिवासी बहुल जिले में यह योजना जरूरतमंद महिलाओं के लिए आर्थिक संबल बन रही है।

शशिकला गोटे की सफलता की कहानी यह दर्शाती है कि जब मैदानी कर्मचारी संवेदनशीलता और समर्पण के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करते हैं, तब दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां भी जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में बाधा नहीं बन पातीं।

*कोंगोपल्ली की शशिकला गोटे की यह कहानी केवल 5 हजार रुपए की आर्थिक सहायता मिलने की नहीं, बल्कि एक गर्भवती मां तक शासन की संवेदनशील पहल पहुंचने, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के समर्पण और सुरक्षित मातृत्व के संकल्प की प्रेरक मिसाल है।

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