रायपुर : 1-2 बकरियों से शुरू किया सफर, बकरी पालन से अब तक 5-6 लाख रुपये की शुद्ध कमाई

1-2 बकरियों से शुरू किया सफर, बकरी पालन से अब तक 5-6 लाख रुपये की शुद्ध कमाई
  • पवन कुमार सोनवानी की मेहनत, नवाचार और विभागीय मार्गदर्शन से पशुपालन बना आर्थिक आत्मनिर्भरता का जरिया
  • कृत्रिम गर्भाधान सहित वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर बढ़ाया पशुधन की गुणवत्ता और आय

रायपुर (CITY HOT NEWS)//

मेहनत, लगन और सही मार्गदर्शन के साथ छोटे स्तर से शुरू किया गया व्यवसाय भी परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने का आधार बन सकता है। सरगुजा जिले के बतौली विकासखंड के ग्राम पंचायत बिलासपुर निवासी श्री पवन कुमार सोनवानी ने बकरी पालन को व्यवसाय के रूप में अपनाकर इसे साबित किया है। वर्ष 2012-13 में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (त्ज्ञटल्) से मिले लाभ के माध्यम से महज 1-2 बकरियों से शुरू हुआ उनका सफर आज 10-12 स्वस्थ बकरियों तक पहुंच चुका है। इस अवधि में वे बकरी पालन से लगभग 5 से 6 लाख रुपये की शुद्ध कमाई कर चुके हैं।

छोटे स्तर से शुरू किया व्यवसाय, धीरे-धीरे बढ़ाया दायरा

पवन कुमार ने पारंपरिक खेती के साथ बकरी पालन की शुरुआत की। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने नियमित देखभाल, उचित आहार और पशुपालन विभाग के मार्गदर्शन को अपनाते हुए इसे धीरे-धीरे व्यवस्थित एवं व्यावसायिक रूप दिया। विभागीय सलाह के अनुसार बकरियों के स्वास्थ्य और प्रजनन पर विशेष ध्यान देने से उनके पशुधन की गुणवत्ता में सुधार हुआ और बकरी पालन का दायरा भी बढ़ता गया।

कृत्रिम गर्भाधान जैसी तकनीक को अपनाया

पशुपालन को अधिक वैज्ञानिक और लाभकारी बनाने के लिए पवन कुमार ने नई तकनीकों का भी उपयोग किया। वर्ष 2021-22 में उन्होंने बकरियों में कृत्रिम गर्भाधान (।तजपपिबपंस प्देमउपदंजपवद) तकनीक का लाभ लिया। इसके साथ ही उचित पोषण, नियमित स्वास्थ्य देखभाल और पशु चिकित्सा विभाग से मिलने वाले तकनीकी मार्गदर्शन को अपनाया। उनके प्रयासों को देखते हुए उन्हें ।ज्ड। योजना के तहत पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।

10-12 स्वस्थ बकरियों से बढ़ी आय

एक-दो बकरियों से शुरू हुआ पवन कुमार का कारोबार अब विस्तार ले चुका है। वर्तमान में उनके पास लगभग 10 से 12 स्वस्थ बकरियां हैं। वर्ष 2012-13 से अब तक बकरी पालन से लगभग 5 से 6 लाख रुपये की शुद्ध आय अर्जित कर चुके हैं। वे बताते हैं कि छोटी शुरुआत के बावजूद नियमित देखभाल, विभागीय मार्गदर्शन और आधुनिक तकनीकों को अपनाने से उन्हें अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने में मदद मिली।

पवन कुमार सोनवानी की यह सफलता बताती है कि सीमित संसाधनों से शुरुआत कर वैज्ञानिक पशुपालन पद्धतियों, बेहतर प्रबंधन और निरंतर मेहनत के माध्यम से पशुपालन को आय के स्थायी साधन के रूप में विकसित किया जा सकता है। उनकी सफलता पारंपरिक खेती के साथ व्यावसायिक पशुपालन को अपनाने की दिशा में अन्य किसानों और पशुपालकों के लिए प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत करती है।

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