
- महज 20 वर्ष की उम्र में बनीं परिवार का सहारा, सार्वजनिक परिवहन सेवा में पेश कर रहीं नारी सशक्तिकरण की मिसाल
- सुबह 6 बजे से रात 9 बजे तक यात्रियों को पहुंचाती हैं गंतव्य, मेहनत और आत्मविश्वास से बना रहीं अपनी पहचान
रायपुर (CITY HOT NEWS)//
आत्मनिर्भरता के लिए दृढ़ संकल्प, मेहनत और कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो उम्र और परिस्थितियां भी सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकतीं। इसकी प्रेरक मिसाल प्रस्तुत कर रही हैं बस्तर जिले के कालीपुर की 20 वर्षीय दीपाली मानिकपुरी। जिस उम्र में अधिकांश युवा अपने भविष्य की दिशा तय कर रहे होते हैं, उस उम्र में दीपाली ने परिवार की जिम्मेदारियों को समझते हुए आत्मनिर्भरता की राह चुनी है। ई-रिक्शा चलाकर सार्वजनिक परिवहन सेवा प्रदान करने वाली दीपाली आज अपने साहस, परिश्रम और आत्मविश्वास से महिला सशक्तिकरण का प्रेरक उदाहरण बन रही हैं।
*पिता की जिम्मेदारियां बांटने के संकल्प ने दिखाई आत्मनिर्भरता की राह*
तीन बहनों में सबसे बड़ी दीपाली मानिकपुरी ने कम उम्र में ही परिवार की आर्थिक परिस्थितियों और जिम्मेदारियों को समझ लिया था। दसवीं कक्षा तक पढ़ाई करने के बाद उन्होंने परिवार को आर्थिक सहयोग देने और अपने पैरों पर खड़े होने का निर्णय लिया। उनके पिता पेशे से कार चालक हैं। पिता को परिवार की जरूरतों के लिए लगातार मेहनत करते देख दीपाली ने भी उनकी जिम्मेदारियों में हाथ बंटाने का संकल्प लिया। इसी सोच के साथ उन्होंने ई-रिक्शा चलाने का निर्णय लिया और स्वयं की मेहनत से आजीविका अर्जित करने की दिशा में कदम बढ़ाया।
*परंपरागत सोच से आगे बढ़कर चुना स्वरोजगार का रास्ता*
सार्वजनिक परिवहन के क्षेत्र में सामान्यतः पुरुषों की अधिक भागीदारी देखने को मिलती है। ऐसे क्षेत्र में दीपाली ने ई-रिक्शा चलाने का निर्णय लेकर यह संदेश दिया है कि महिलाएं अपनी इच्छाशक्ति और मेहनत से किसी भी कार्यक्षेत्र में अपनी पहचान बना सकती हैं। शुरुआत में लोगों के लिए एक युवती को ई-रिक्शा चलाते देखना भले ही नया अनुभव रहा हो, लेकिन दीपाली ने बिना किसी झिझक के अपने काम को पूरी जिम्मेदारी और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ाया। आज वे यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाकर सार्वजनिक परिवहन सेवा में अपनी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
*सुबह 6 बजे शुरू होता है सफर, रात 9 बजे तक निभाती हैं जिम्मेदारी*
दीपाली की दिनचर्या उनकी मेहनत और लगन को दर्शाती है। वे प्रतिदिन सुबह 6 बजे अपना ई-रिक्शा लेकर निकलती हैं और रात 9 बजे तक यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने का कार्य करती हैं। लगभग 15 घंटे की इस व्यस्त दिनचर्या में वे पूरी जिम्मेदारी और समर्पण के साथ अपनी सेवाएं देती हैं।

