
- मातृत्व से बाल्यावस्था तक पोषण और स्वास्थ्य पर फोकस, योजनाओं से महिलाओं को आर्थिक-सामाजिक संबल
- प्रधानमंत्री मातृ वंदना, आंगनबाड़ी सेवाएं, बिहान और महतारी वंदन से पोषण के साथ सशक्तिकरण की राह
- पोषण में आज का निवेश, स्वस्थ-सक्षम मानव संसाधन के रूप में देगा भविष्य का लाभ
- सुनील त्रिपाठी , सहायक संचालक
- मेघा यादव , सहायक सूचना अधिकारी
रायपुर (CITY HOT NEWS)//

किसी भी राज्य के विकास की सबसे मजबूत पूंजी उसके स्वस्थ और सक्षम नागरिक होते हैं। एक स्वस्थ मां से स्वस्थ परिवार और सुपोषित बच्चे से सक्षम पीढ़ी की नींव तैयार होती है। इसी सोच के साथ छत्तीसगढ़ में महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और आर्थिक-सामाजिक सशक्तिकरण से जुड़ी विभिन्न योजनाएं उनके जीवन में बदलाव का माध्यम बन रही हैं। मातृत्व के संवेदनशील समय में आर्थिक सहयोग से लेकर आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषण और प्रारंभिक शिक्षा तथा स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं की आजीविका तक, ये प्रयास पोषण को परिवार और समाज के समग्र विकास से जोड़ रहे हैं।

पोषण का अर्थ केवल पर्याप्त भोजन उपलब्ध होना नहीं है। गर्भावस्था से लेकर शिशु अवस्था, बाल्यावस्था और किशोरावस्था तक संतुलित पोषण स्वास्थ्य और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसी कारण आंगनबाड़ी सेवाओं, पोषण गतिविधियों, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, बिहान और महतारी वंदन योजना जैसी पहलों के माध्यम से महिलाओं और बच्चों तक पोषण, जागरूकता और आर्थिक सहयोग पहुंचाया जा रहा है।

मातृत्व के संवेदनशील समय में पोषण का संबल
अंबिकापुर की अन्नू तिवारी का अनुभव बताता है कि मातृत्व के दौरान मिलने वाली आर्थिक सहायता किस तरह पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायक बन सकती है। पहली बार गर्भवती होने पर उन्हें आंगनबाड़ी केंद्र से प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की जानकारी मिली। आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्हें चरणबद्ध रूप से योजना की राशि प्राप्त हुई, जिसका उपयोग उन्होंने अपने खान-पान और पोषण संबंधी जरूरतों के लिए किया। गर्भावस्था और प्रसव के बाद महिला के लिए उचित पोषण विशेष महत्व रखता है। ऐसे समय में मिलने वाला आर्थिक सहयोग परिवार को पोषण और स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं पर अधिक ध्यान देने का अवसर देता है। अन्नू का अनुभव इसी सहयोग की उपयोगिता को सामने लाता है।

स्वस्थ महिला से मजबूत होता है पूरा परिवार
महिला का पोषण केवल उसके व्यक्तिगत स्वास्थ्य का विषय नहीं है। इसका संबंध परिवार की देखभाल, बच्चों के पोषण और दैनिक जीवन की अनेक जिम्मेदारियों से भी है। पर्याप्त पोषण महिला की सक्रियता और स्वास्थ्य को सहारा देता है, जिससे वह परिवार और सामाजिक जीवन में बेहतर भागीदारी कर सकती है। जब स्वास्थ्य के साथ महिला को आर्थिक अवसर भी मिलते हैं तो उसका आत्मविश्वास और निर्णयों में भागीदारी बढ़ती है। इस तरह पोषण और महिला सशक्तिकरण एक-दूसरे के पूरक बनकर परिवार की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में भूमिका निभाते हैं।
लक्ष्मी ने पोषण को बनाया सेवा और आजीविका का माध्यम
ग्राम खैरबार की लक्ष्मी यादव की कहानी पोषण और महिला सशक्तिकरण के इसी संबंध को सामने लाती है। बिहान के माध्यम से स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें ‘पोषण सखी’ के रूप में कार्य करने का अवसर मिला। अब वे आर्थिक गतिविधि से जुड़ने के साथ गांव की गर्भवती एवं शिशुवती माताओं और बच्चों को पोषण एवं स्वास्थ्य के प्रति जागरूक कर रही हैं। घर-घर जाकर संतुलित आहार, स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने वाली लक्ष्मी की भूमिका बताती है कि अवसर और आजीविका मिलने पर महिलाएं अपने परिवार के साथ पूरे समुदाय में सकारात्मक बदलाव की सहभागी बन सकती हैं। उन्हें मिलने वाली आय के साथ महतारी वंदन योजना की आर्थिक सहायता भी परिवार के लिए अतिरिक्त संबल बन रही है।
आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषण के साथ सीखने का बेहतर वातावरण
बच्चों के पोषण और प्रारंभिक विकास में आंगनबाड़ी केंद्रों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उदयपुर विकासखंड का सलकापारा आंगनबाड़ी केंद्र इसका उदाहरण है। पहले किराए के जर्जर भवन और सीमित स्थान में संचालित केंद्र अब नवनिर्मित भवन में संचालित हो रहा है। आईसीडीएस और विकसित भारत जी राम जी योजना के अभिसरण से निर्मित भवन में बड़ा हॉल, रसोई, स्टोर, शौचालय, बाथरूम और पेयजल जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। यहां बच्चों को प्री-स्कूल शिक्षा और पोषण संबंधी सेवाओं का लाभ मिल रहा है। गर्भवती माताएं और किशोरी बालिकाएं भी स्वास्थ्य एवं पोषण से जुड़ी सेवाओं से जुड़ रही हैं। यह बदलाव बताता है कि बच्चों के समग्र विकास के लिए पोषण के साथ सुरक्षित भवन, स्वच्छता, पेयजल, प्रारंभिक शिक्षा और जागरूकता का वातावरण भी महत्वपूर्ण है।
आज का सुपोषित बच्चा, कल का सक्षम नागरिक
जीवन के शुरुआती वर्षों में पर्याप्त पोषण बच्चे के शारीरिक विकास और सीखने की क्षमता को सहारा देता है। स्वस्थ बच्चा शिक्षा, खेल और अन्य गतिविधियों में बेहतर ढंग से भाग ले सकता है। इसलिए बच्चों के शुरुआती वर्षों में स्वास्थ्य और पोषण पर किया गया निवेश वास्तव में आने वाली पीढ़ी में निवेश है। आज स्वस्थ वातावरण में बढ़ने वाला बच्चा आगे चलकर अपनी शिक्षा और क्षमताओं के अनुरूप विभिन्न क्षेत्रों में योगदान दे सकता है। यही मानव संसाधन भविष्य में राज्य की सामाजिक और आर्थिक प्रगति का आधार बनता है।
पोषण से परिवार और परिवार से मजबूत होता है समाज
पोषण का प्रभाव एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। स्वस्थ मां बच्चों की बेहतर देखभाल कर सकती है। स्वस्थ और सुपोषित बच्चा शिक्षा तथा विकास के अवसरों का बेहतर उपयोग कर सकता है। आगे चलकर यही स्वस्थ और शिक्षित पीढ़ी रोजगार, उद्यम, कृषि और अन्य सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों में योगदान देती है। इस दृष्टि से पोषण पर किया गया निवेश मानव संसाधन की गुणवत्ता मजबूत करने का भी निवेश है। स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण का यह जुड़ाव परिवारों को अधिक सक्षम बनाने के साथ समाज के दीर्घकालिक विकास को आधार देता है।
पोषण से सशक्तिकरण तककृभविष्य की मजबूत नींव
महिलाओं और बच्चों से जुड़ी योजनाओं का महत्व तत्काल सहायता से आगे बढ़कर भविष्य की स्वस्थ और सक्षम पीढ़ी तैयार करने से जुड़ता है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना मातृत्व के दौरान आर्थिक सहयोग देती है, आंगनबाड़ी सेवाएं पोषण एवं प्रारंभिक शिक्षा का आधार बनती हैं, बिहान महिलाओं को समूह और आजीविका से जोड़ता है, वहीं महतारी वंदन योजना की आर्थिक सहायता महिलाओं को अतिरिक्त संबल प्रदान करती है।
आज गर्भवती महिला के पोषण और स्वास्थ्य पर दिया गया ध्यान कल स्वस्थ बच्चे की नींव बन सकता है। आज बच्चे को मिला पोषण और प्रारंभिक सीखने का बेहतर वातावरण कल उसकी क्षमताओं को विकसित करने में सहायक हो सकता है। सुपोषित महिला, स्वस्थ बच्चा और सक्षम युवा की यही श्रृंखला आत्मनिर्भर, सशक्त और विकसित छत्तीसगढ़ की मजबूत मानवीय पूंजी तैयार करने का आधार है।

