रायपुर : मजदूरी की डगर से रेशम के ताने-बाने तक

मजदूरी की डगर से रेशम के ताने-बाने तक
  • टसर कोसा ने बदली सारंगढ़-बिलाईगढ़ के ध्रुवकुमार की तकदीर

रायपुर (CITY HOT NEWS)//

मजदूरी की डगर से रेशम के ताने-बाने तक

कभी भूमिहीन होने के कारण मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करने वाले सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला विकासखंड अंतर्गत ग्राम-सण्डा निवासी ध्रुवकुमार ने मेहनत, लगन और विभागीय मार्गदर्शन से अपनी जिंदगी की दिशा बदल दी। मजदूरी ही उनकी आय का मुख्य साधन था। परिवार की जरूरतें बढ़ने के साथ उन्होंने अतिरिक्त आमदनी के अवसर टसर रेशम उत्पादन के रूप में मिला।

*ध्रुवकुमार टसर रेशम उत्पादन से अपनी तकदीर की नई इबारत लिख रहे हैं*

   यदि संकल्प मजबूत हो और उसे सही शासकीय मार्गदर्शन का सहारा मिल जाए, तो अभावों में सिमटी जिंदगी भी समृद्धि की ओर मुड़ सकती है। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला विकासखंड अंतर्गत ग्राम-सण्डा निवासी ध्रुवकुमार के जीवन में आई तब्दीली इस बात का जीवंत उदाहरण है। कभी सीमित खेती और अनिश्चित मजदूरी के भरोसे अपने परिवार का गुज़र-बसर करने वाले धु्रवकुमार आज टसर रेशम उत्पादन के ज़रिए अपनी तकदीर की नई इबारत लिख रहे हैं।

       ध्रुवकुमार पिता श्री दुडूराम का परिवार पहले पूरी तरह से पारंपरिक खेती पर निर्भर था। मौसमी खेती से होने वाली सीमित आय के बीच घर की दैनिक जरूरतों को पूरा करना ही एक बड़ी चुनौती हुआ करता था, जिससे बच्चों की बेहतर शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य का सपना अक्सर पीछे छूट जाता था। इसी जद्दोजहद के बीच उनका संपर्क रेशम विभाग से हुआ, जहाँ से उनकी आजीविका में एक युगांतकारी बदलाव की शुरुआत हुई।

        ​रेशम विभाग एवं केंद्रीय रेशम बोर्ड द्वारा आयोजित जागरूकता कार्यक्रमों में भाग लेकर उन्होंने वैज्ञानिक पद्धति से टसर कृमिपालन की बारीकियों को सीखा। विभागीय मार्गदर्शन में रियायती दरों पर प्राप्त स्वस्थ डिंब समूह की मदद से ध्रुवकुमार ने बेहद सतर्कता और लगन के साथ कोसा उत्पादन शुरू किया। उनकी मेहनत रंग लाई और धीरे-धीरे गुणवत्तायुक्त टसर ककून का उत्पादन उनकी आजीविका का मुख्य स्तंभ बन गया। इसके साथ ही, रेशम केंद्र के उद्यान संधारण का दायित्व संभालकर उन्होंने अपनी आय के दायरे को और अधिक विस्तार दिया।

*77 हजार रुपये से अधिक की अतिरिक्त आय अर्जित* 

         ​उनकी इस अटूट लगन का ही परिणाम है कि वर्ष 2024-25 में जहाँ उन्होंने 3 लाख 21 हजार रुपये से अधिक का मुनाफा कमाया, वहीं वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 3 लाख 63 हजार रुपये तक पहुँच गया। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में भी अब तक वे 77 हजार रुपये से अधिक की अतिरिक्त आय अर्जित कर चुके हैं। टसर कृमिपालन से मिल रही इस निरंतर और सुरक्षित आमदनी ने न केवल उनके परिवार को आर्थिक संबल प्रदान किया है, बल्कि उनके बच्चों के लिए उच्च और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के द्वार भी खोल दिए हैं।

*टसर उत्पादन से स्वावलंबन और आर्थिक समृद्धि मार्ग प्रशस्त*

        ​सेवा संकल्प अभियान के तहत सामने आई ध्रुवकुमार की यह सफलता आज क्षेत्र के अन्य ग्रामीण किसानों और मजदूरों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है। रेशम विभाग के साथ अपनी इस यात्रा को आगे बढ़ाने के लिए संकल्पित ध्रुवकुमार अब आसपास के किसानों को भी टसर उत्पादन अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं, ताकि वे भी स्वावलंबन और आर्थिक समृद्धि का नया अध्याय लिख सकें।

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